याचिका में यह भी कहा गया कि फीस वसूली की यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(g) (पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करती है। साथ ही, यह व्यवस्था एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24(1)(f) के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पहले भी अदालत ने याचिकाकर्ता को सीधे अदालत आने से पहले बार काउंसिल से संपर्क करने की सलाह दी थी। अब जबकि BCI ने अपने खर्च और प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है, इसलिए यह याचिका टिकाऊ नहीं है।
AIBE 2025: फीस पर अब नहीं मिलेगी राहत
याचिकाकर्ता ने न केवल भविष्य में शुल्क वसूली पर रोक लगाने की मांग की थी, बल्कि पहले से लिए गए शुल्क की वापसी भी मांगी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि BCI द्वारा तय की गई फीस व्यवस्था कानूनी रूप से वैध है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।