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खेती-किसानी में नई तकनीक: एआई बताएगा कहां बेचें फसल, किसानों को मिलेगी बेहतर कीमत, जानें पूरा तरीका और फायदा

Sun, 08 Nov 2026 11:30 AM IST
शिवम तिवारी अमर उजाला ब्यूरो

सार

इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय की छात्रा ओशीन मल्होत्रा ने किसानों के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किया है। यह किसानों को फसल की बेहतर कीमत देने वाली मंडियों और बाजारों की जानकारी देगा। गूगल की फंड माय क्रेजी-2026 प्रतियोगिता में इस प्रोजेक्ट को पहला स्थान मिला और ओशीन को 20 लाख रुपये का पुरस्कार मिला। जानें इसकी खासियत और किसानों को कैसे मदद मिलेगी?
 
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AI for Farmers - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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अब किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बेहतर बाजार तलाशने में एआई की मदद मिल सकेगी। इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय (आईजीडीटीयूडब्ल्यू) की छात्रा ओशीन मल्होत्रा ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो किसानों को उनकी फसल की अच्छी कीमत देने वाली मंडियों और बाजारों के बारे में जानकारी देगा। इस तकनीक का मकसद किसानों को सही जगह पर फसल बेचने में मदद करना है। इससे किसान अलग-अलग बाजारों की कीमतों की जानकारी लेकर यह समझ सकेंगे कि उनकी उपज कहां बेचने पर उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता है।

ओशीन को प्रतियोगिता में क्या मिला?

ओशीन मल्होत्रा के इस एआई आधारित प्रोजेक्ट को गूगल की फंड माय क्रेजी-2026 प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी दी गई। इस प्रतियोगिता में देशभर से कुल 1 लाख 92 हजार प्रविष्टियां आई थीं। इतनी बड़ी संख्या में आए प्रोजेक्ट के बीच पहला स्थान हासिल करना ओशीन के लिए बड़ी उपलब्धि है। उनके इस काम को विश्वविद्यालय ने भी सराहा है। आईजीडीटीयूडब्ल्यू की कुलपति प्रो. रंजना झा ने इसे पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात बताया है।

एआई प्लेटफॉर्म कैसे करेगा काम?

यह प्लेटफॉर्म एआई की मदद से कृषि बाजार से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को समझेगा और उनका विश्लेषण करेगा। इसमें मंडियों में फसल के भाव, उपज की उपलब्धता, खरीदारों की मांग और मौसम से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा खेती और बाजार से जुड़ी दूसरी जानकारियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इन सभी जानकारियों को एक साथ देखकर प्लेटफॉर्म किसानों को यह समझने में मदद करेगा कि उनकी फसल के लिए कौन-सा बाजार बेहतर हो सकता है। इस तरह किसानों को फसल बेचने से पहले बाजार की स्थिति जानने का एक नया तरीका मिलेगा।

किसानों को इस तकनीक से क्या फायदा होगा?

किसान अपनी फसल और उसकी मात्रा के हिसाब से उन मंडियों और बाजारों की जानकारी हासिल कर सकेंगे, जहां उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। अभी कई बार किसानों को सही बाजार की जानकारी नहीं मिल पाती और उन्हें अपनी फसल कम दाम पर बेचनी पड़ती है। इस प्लेटफॉर्म से उन्हें अलग-अलग जगहों के भाव और खरीदारों की मांग समझने में मदद मिल सकती है। इससे फसल बेचने के लिए बाजार चुनना आसान होगा। साथ ही, गलत जगह फसल भेजने और उससे जुड़े अतिरिक्त परिवहन खर्च से बचने में भी मदद मिल सकती है।

ओशीन का इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या सपना है?

ओशीन मल्होत्रा इस प्रोजेक्ट को भारतीय कृषि के लिए एक बड़े सूचना प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना चाहती हैं। उनका सपना इसे भारतीय कृषि का ब्लूमबर्ग टर्मिनल बनाना है। ब्लूमबर्ग टर्मिनल की तरह यह प्लेटफॉर्म भी बाजार से जुड़ी जरूरी जानकारियां एक जगह उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा। इससे किसानों को फसल के भाव, बाजार की मांग और उपज की उपलब्धता जैसी जानकारियां समझने में मदद मिल सकती है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रंजना झा ने भी भरोसा जताया है कि ओशीन की यह पहल भविष्य में भारतीय कृषि के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
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