पाठ्यक्रम समिति से मिली मंजूरी
बोर्ड पहले से ही कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए गणित के दो स्तर प्रदान करता है। पाठ्यक्रम समिति ने इस विचार को मंजूरी दे दी है, जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप है। हालांकि, बोर्ड के शासी निकाय ने अभी तक अपनी मंजूरी नहीं दी है।
एनईपी के अनुसार, गणित से शुरू होने वाले सभी विषय और संबंधित मूल्यांकन दो स्तरों पर पेश किए जा सकते हैं, जिसमें कुछ छात्र मानक स्तर पर और अन्य उन्नत स्तर पर विषयों का अध्ययन करेंगे।
पाठ्यक्रम समान, लेकिन प्रश्नों की कठिनाई का स्तर अलग
सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "प्रस्ताव को पाठ्यक्रम समिति ने मंजूरी दे दी है। हालांकि, लॉजिस्टिक्स और रूपरेखा पर अभी काम किया जाना बाकी है। वर्तमान में, हम कक्षा 10वीं में दो स्तरों पर केवल एक विषय प्रदान करते हैं। गणित (स्टैण्डर्ड) और गणित (बेसिक) चुनने वाले छात्रों के लिए पाठ्यक्रम समान है, लेकिन बोर्ड परीक्षा में प्रश्नपत्र और प्रश्नों का कठिनाई स्तर अलग-अलग होता है।"
अधिकारी ने कहा, "कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए दो स्तरों पर विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पेशकश करने के पीछे का उद्देश्य इन विषयों के लिए योग्यता रखने वाले छात्रों को कक्षा 11वीं में इन विषयों को लेने से पहले उन्नत स्तर पर उनका अध्ययन करने की अनुमति देना है।"
बोर्ड ने अभी तक इस विकल्प को शुरू करने की समयसीमा तय नहीं की है, क्योंकि नए पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) के अनुसार एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें अभी तक तैयार नहीं हैं। सीबीएसई ने नए एनसीएफ में अनुशंसित बोर्ड परीक्षाओं के दो दौर के शेड्यूलिंग की योजना पर भी अभी फैसला नहीं किया है। मंत्रालय की शुरुआती योजना 2024-25 शैक्षणिक सत्र से द्विवार्षिक बोर्ड परीक्षाएं शुरू करने की थी। हालांकि, इसे टाल दिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप, इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय संचालन समिति द्वारा तैयार की गई नई एनसीएफ में कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए सेमेस्टर प्रणाली का प्रस्ताव रखा गया है।