में एसिड अटैक सर्वाइवर द्वारा एक प्रोत्साहना सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की पहल इन्वर्टिस के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा की गयी जिसका उद्देश्य समाज में हो रहे निंदनीय प्रयास पर रोक लगाने और उसके प्रति लोगों को जागरूक करना था।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छांव फाउंडेशन के निदेशक आलोक दीक्षित, सह निदेशक दुर्गा प्रसाद शुक्ला, शीरोज एवं छांव की सदस्य अंशु राजपूत रहीं जो खुद इस अपराध का
शिकार हुई थी। छांव फाउंडेशन एक संस्थान है जो उन सभी के लिए लड़ता है और हर संभव मदद प्रदान करता है जो इस अपराध का शिकार हो जाते हैं।
शीरोज़ भी उसी संस्थान का एक हिस्सा है जो आगरा एवं लखनऊ में, संस्थान कैफे के रूप में इन पीड़ितों को रोज़गार देकर सशक्त बनाने का कार्य करता है। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा की गयी इस पहल के ज़रिये इन्वर्टिस विश्वविद्यालय ने इस संस्थान को पचास हजार की आर्थिक सहयोग प्रदान की।
जिसमे पूरे विश्वविद्यालय ने अपना योगदान दिया। इस धनराशि के जरिये इस संस्थान को अपराध के खिलाफ लड़ने के लिए और महिलाओं के उपचार के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
छांव फाउंडेशन के निदेशक आलोक दीक्षित ने इस संस्थान के बारे में चर्चा करते हुए छांव फाउंडेशन को स्थापित करने के सफर एवं उसमे आई मुश्किलों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि किस तरह आज भी समाज अपराधियों को पनाह देता है और पीड़िताओं को अपनाने से कतराता है जबकि उसमे उनकी कोई गलती नहीं होती।
उन्होंने बताया कि किस तरह छांव के जरिये उन सभी को इंसाफ दिलाने की कोशिश करते हैं और उन्हें पुनः आत्मनिर्भर बनाकर यह एहसास दिलाते हैं कि वो किसी से कम नहीं है। छात्रों को संबोधित करते हुए श्री आलोक दीक्षित ने कहा कि तेजाब तो सिर्फ एक जरिया है, असली तेजाब तो इंसान के दिमाग में होता है जिसे खत्म करके ही इस कुप्रथा को रोका जा सकता है।
अगर पुरुष खुद को एक प्रतिशत भी महिला की जगह रख कर सोचें तो ऐसी घटनाओं पर अवश्य ही रोक लग जायेगी। अंत में उन्होंने सभी से आग्रह किया की महिला समाज का एक अभिन्न हिस्सा है अतः हमें उनकी इज्जत कर उन्हें एक महान दर्जा देना चाहिए। हमले के बाद उनका चेहरा ही नहीं बल्कि उनका आत्मबल भी टूट जाता है जिसे समाज ही दुबारा खड़ा कर सकता है।