कृष्णा की प्राथमिक शिक्षा घर पर ही हुई है। अब उत्तर प्रदेश बोर्ड ने कृष्णा को महज आठ साल की उम्र में ही नौवीं कक्षा में दाखिला लेने की अनुमति दे दी। उसके पिता पवन कुमार आचार्य ज्योतिष हैं। उनके अनुसार, 'कृष्णा का पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर है। उसे मैथ्स और सोशल साइंस का काफी अच्छा ज्ञान है। हिन्दी और अंग्रेजी के साथ-साथ वह फ्रेंच भाषा भी जानता है।'
पवन कुमार बताते हैं कि उन्होंने कृष्णा को नौवीं में दाखिला दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश (यूपी) बोर्ड में एक आवेदन भेजा था। इसके बाद कृष्णा की परीक्षा ली गई। फिर उसे दाखिला मिला।
उसके स्कूल के प्राचार्य एचएन उपाध्याय ने कहा कि 'जब कृष्णा के पिता ने हमसे उनके आठ साल के बेटे को नौवीं में दाखिला देने की अपील की, तो हमें भी आश्चर्य हुआ। फिर शिक्षकों ने प्रवेश के लिए उसकी परीक्षा ली। उसने प्रवेश परीक्षा में बेहद शानदार प्रदर्शन किया। तब जाकर हमने बोर्ड को एक चिट्ठी लिखी और कृष्णा को कम उम्र में ऊंची कक्षा में दाखिला देने की अनुमति मांगी। बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति मिलने के बाद ही हमने आगे की प्रक्रियाएं शुरू की जो अब पूरी हो चुकी हैं।'
गौरतलब है कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में ऐसा मामला देखा जा चुका है। साल 2007 में सुषमा वर्मा नाम की छात्रा ने महज 7 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास कर ली थी। फिर 13 साल की उम्र में बीएससी पूरा कर लिया था। इसके लिए लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सुषमा का नाम भी दर्ज किया जा चुका है। सुषमा के बड़े भाई शैलेंद्र ने भी 14 साल की उम्र में बीएससी पूरा कर लिया था। ये दोनों भी लखनऊ से ही हैं।