अभिभावकों और मीडिया की उपस्थिति में हुआ ड्रॉ
सूद ने कहा कि पहले की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी। लेकिन इस साल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में पूरी निष्पक्षता सुनिश्चित की गई। ड्रॉ को अभिभावकों और मीडिया की उपस्थिति में आयोजित किया गया और इस बार पंजीकरण की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दी गई।
इस साल नर्सरी में प्रवेश के लिए 24,933 सीटें थीं, जिनके लिए 1,00,854 आवेदन आए। किंडरगार्टन (केजी) में 4,682 सीटों के लिए 40,488 आवेदन मिले, जबकि कक्षा-1 की 14,430 सीटों के लिए 62,598 आवेदन प्राप्त हुए।
3134 स्कूलों में हुई प्रवेश प्रक्रिया
मंत्री ने बताया कि कुल 3,134 स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया हुई, जिनमें नर्सरी के लिए 1,299, केजी के लिए 622 और कक्षा 1 के लिए 1,213 स्कूल शामिल थे। नर्सरी के लिए ड्रॉ सफलतापूर्वक पूरा किया गया और सभी डेटा को सुरक्षित रखा गया।
ड्रॉ में चयनित छात्रों को दस्तावेज़ सत्यापन (DV) के लिए बुलाया जाएगा। तीन सदस्यीय समिति को शिक्षा निदेशक को हस्ताक्षरित सीडी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सभी चयनित छात्रों को शाम तक सूचना भेजी जाएगी और उन्हें डीओई कार्यालय में दस्तावेज़ सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। सत्यापन के बाद, स्कूल किसी भी दस्तावेज़ से संबंधित कारणों के आधार पर प्रवेश से इनकार नहीं कर सकते।
प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ड्रॉ आयोजित करने वाले कमरे में किसी को भी मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। इस कदम से किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोका गया।
इन छात्रों को आवेदन का एक और मौका
मंत्री ने यह भी बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, ट्रांसजेंडर छात्रों और अन्य श्रेणियों के लिए आवेदन प्रक्रिया का समय बढ़ा दिया गया है, क्योंकि इन श्रेणियों में आवेदन अपेक्षाकृत कम प्राप्त हुए हैं।