चुनाव प्रचार के लिए नेताजी कुछ भी करने को तैयार हैं। तरह-तरह के फंडे ये अपना रहे हैं। नेताजी ने बैंड वालों का सहारा ले रखा है।
नेताजी कहीं भी जाते हैं, बैंड वाले इसकी सूचना क्षेत्र में बैंड बजाकर दे रहे हैं। बैंड बजते ही लोग घरों से बाहर निकल कर देखने लगते हैं कि किसकी बारात निकल रही है। पर यहां तो माजरा कुछ और ही दिखता है।
पता चलता है, नेताजी आ रहे हैं। लोगों के घरों से बाहर निकलने का फायदा नेताजी एकदम से उठाते हैं। हवा में हाथ लहराते हैं और जनता से वोट की अपील कर देते हैं।
उल्टा पड़ गया नेताजी का दांव
शुक्रवार को शहर के एक वार्ड में नेताजी की यह दांव कुछ उलटा पड़ गया। बैंड वालों ने एक पार्टी के बड़े नेता के वार्ड में पहुंचते ही ‘अरे दीवानों, मुझे पहचानो, कहां से आया मैं हूं कौन, मैं हूं डॉन-मैं हूं डॉन’ गीत की धुन बजा दी।
यह धुन बजते ही नेताजी बगले झांकने लगे। कार्यकर्ता एक दूसरे से कहने लगे कि ...अरे धुन को बदलवाओ। मतदाता वोट तो क्या वार्ड में भी नहीं घुसने देंगे।
इस दौरान वार्ड में खडे़ कुछ युवा बोलते हुए सुनाई दिए कि यह पार्टी मतदाताओं की सेवा करने आई है या धमकाने। उधर, इतने में बैंड वालों ने धुन भी बदल दी।