पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब को एआई समिट विरोध प्रदर्शन मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि,अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है, लेकिन रिहाई से पहले जमानत बॉन्ड और श्योरिटी दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी वंशिका मेहता ने श्योरिटी और उससे जुड़े दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट रविवार तक मांगी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक चिब को रिहा नहीं किया जाएगा। इसी कारण उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
चार दिन की पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद चिब को शनिवार देर रात करीब 12:30 बजे अदालत में पेश किया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आवास पर आधी रात को सुनवाई हुई, जो करीब 1:30 बजे शुरू हुई। अदालत ने चिब को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और अन्य शर्तों पर जमानत दी।
शर्तों में पासपोर्ट जमा करना और अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कोर्ट के समक्ष पेश करना शामिल है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने चिब की पुलिस हिरासत सात दिन और बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए मांग खारिज कर दी कि जांच एजेंसी आगे की रिमांड के लिए पर्याप्त कारण नहीं बता सकी। वहीं, सरकारी पक्ष ने दो अन्य आरोपियों की हिरासत बढ़ाने के लिए भी अलग-अलग आवेदन दिए थे।
पुलिस हिरासत बढ़ाने की जरूरत को सही ठहराया नहीं जा सका
चिब की ओर से पेश वकील ने कहा कि अदालत ने माना कि पुलिस हिरासत बढ़ाने की जरूरत को सही ठहराया नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि जमानत देते समय अदालत ने 50,000 रुपये का बॉन्ड जमा करने और अन्य शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया। एक अन्य वकील ने कहा कि चिब की गिरफ्तारी नई नहीं थी, क्योंकि वह पहले ही चार दिन पुलिस हिरासत में रह चुके हैं।
उन्होंने बताया कि बचाव पक्ष को देर शाम सूचना मिली थी कि पेशी होगी, लेकिन बाद में रात करीब 12:30 बजे कॉल आया कि उन्हें रात 1 बजे पेश किया जाएगा। सुनवाई देर रात शुरू हुई। 24 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। उस समय अदालत ने कहा था कि केस डायरी के अनुसार चिब विरोध स्थल पर शारीरिक रूप से मौजूद नहीं थे, लेकिन उन पर प्रदर्शन को निर्देशित करने और अन्य आरोपियों से संपर्क में रहने का आरोप है।