जल्द ही जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक सीधी रेल सेवा शुरू होगी। दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब रेलवे ब्रिज बनकर तैयार होने वाला है। इससे न केवल यात्री ट्रेन, बल्कि सैनिकों की स्पेशल ट्रेनें भी तेज रफ्तार से दौड़ेंगी।
जम्मू-कश्मीर बारामुला लिंक रेल प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले चिनाब आर्क का निचला आर्क सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। इस महीने के अंत तक ऊपर वाले आर्क का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर देगा। निचले आर्क का काम पूरा होते ही केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर सफलतापूर्वक किए गए कार्य की सराहना करने के साथ एक वीडियो भी शेयर किया। 272 किलोमीटर लंबाई वाले इस रेल लिंक प्रोजेक्ट के तहत 161 किलोमीटर ट्रैक बनकर तैयार है। इसमें 119 किलोमीटर का ट्रैक टनल से होकर गुजरता है।
माना जा रहा है कि आजादी के बाद भारतीय रेलवे के इतिहास में यह पुल मील का पत्थर साबित होगा, जो विज्ञान और तकनीक का बेहतरीन नमूना पेश करेगा। इस प्रोजेक्ट में कुल 38 टनल हैं, जिसमें सबसे लंबी टनल की लंबाई 12.75 किलोमीटर है। ब्रिज को बनाने के लिए खास तरह के दो केबल कार बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता 20 और 37 मीट्रिक टन है। रेल अधिकारियों का कहना है कि 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी हवा चली तो यह पुल आसानी से टिका रहेगा।
बारामुला रेल लिंक पर चिनाब आर्क ब्रिज की लंबाई 467 मीटर है। इस पुल की कुल लंबाई 1315 मीटर है। नदी के तल से इसकी ऊंचाई 359 मीटर है, जो एफिल टावर व कुतुब मीनार की ऊंचाई से अधिक है। इसमें 26 बड़े और 11 छोटे पुल हैं। 37 पुलों की कुल लंबाई 7 किमी है। इसमें 35 टनल हैं। इनमें 27 मुख्य टनल हैं, जबकि 8 एस्केप टनल हैं।
28 हजार करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट
उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक पर 111 किलोमीटर के सबसे कठिन सेक्शन को उत्तर रेलवे ने दिसंबर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। 272 किलोमीटर के इस रेल लिंक पर 28 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 111 किलोमीटर के कटड़ा-बनिहाल सेक्शन पर काम चल रहा है। 2002 में इसे राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट घोषित किया गया था।
...और जयकारों से गूंज उठी चिनाब घाटी
नीचे बर्फीले पानी के तेज बहाव में बहती चिनाब नदी और ऊपर इंजीनियरिंग की नई इबारत लिखने में जुटे जांबाज इंजीनियर और वर्कर। जमीनी सतह से 359 मीटर की ऊंचाई पर बन रहे चिनाब रेलवे पुल पर जैसे ही निचले आर्क के दोनों छोर आपस में जुड़े तो चिनाब घाटी जयकारों से गूंज उठी। 3200 इंजीनियरों और कर्मियों की मेहनत से आकार ले रहे पुल पर पहले - बोले-बोले छत्रपति शिवाजी की जय और फिर बोले सो निहाल सत श्री अकाल के नारे लगाए गए।
अगले 120 साल के लिए बनाया जा रहा पुल
रेलवे की राष्ट्रीय परियोजना के इतिहास में अब तक का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण पुल को अगले 120 साल के लिए बनाया जा रहा है। पुल निर्माण साइट की भौगोलिक परिस्थितियां भूकंप और तेज हवा से भी चुनौती खड़ी करती हैं, लेकिन इंजीनियरिंग का अजूबा कहा जा रहा यह पुल तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर पूरी मजबूती से पूरा होने जा रहा है।