देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा की कठिन प्रवेश परीक्षा प्रतियोगियों से संयम की मांग करती है और प्रतिबद्धता व दृढ़ता से डटे रहने की अपेक्षा भी है। परीक्षा का विस्तृत दायरा तैयारी करने वालों की दुनिया को सीमित कर देता है। इनके पूरे 24 घंटे अमूमन छोटे से कमरे, कोचिंग या लाइब्रेरी व चाय की दुकान पर गुजर जाते हैं। यही इनके फैशन का ट्रेंड सेट करती है। वह उन्हीं चीजों को इसमें शामिल करते हैं, जिनसे सिविल सेवक बनने का उनका मुख्य लक्ष्य बाधित न होने पाए।
ढीली टी-शर्ट, लोअर, दाढ़ी और चप्पल, कुर्ता, जींस..., ओल्ड राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर और कटवरिया सराय की गलियों व सड़कों पर नजर आने वाले प्रतियोगियों का आमतौर पर यही पहनावा होता है। खासतौर पर तीन-चार साल से परीक्षा की तैयारी करने वालों का यही फैशन है। नए आने वाले प्रतियोगियों में थोड़ी विविधता दिखती है। पहले दो-तीन साल में उन पर बॉलीवुड और दक्षिण के टॉलीवुड का भी असर दिखता है।
चार साल से ओल्ड राजेंद्र नगर में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे संयम ने बताया कि हमने अपने दोस्तों में देखा है कि समय गुजरने के साथ फैशन का एक ट्रेंड सेट हो जाता है। पहनावा बड़ा सामान्य होता है, लेकिन देखते ही पता लग जाता है कि वह सिविल सेवा का आकांक्षी है। हां, नए प्रतियोगियों में थोड़ी विविधता दिखती है। इसमें संबंधित प्रतियोगी के पहनावा फिल्मी दुनिया से प्रभावित होता है। संयम ने मुस्कुराते हुए कहा कि कई नए प्रतियोगी आज बोलते हुए सुने जा सकते हैं...‘पुष्पा बेशक न झुके, लेकिन छात्रों को यूपीएससी के आगे झुकना होगा।’ पहनावा सामान्य होने पर छात्रों का कहना है कि हमारा दायरा बहुत सिमटा हुआ है। पूरा साल तैयारी में गुजर जाता है। घर के शादी-ब्याह में जाने का मौका नहीं मिलता। गर्मी में बरमूडा, टी-शर्ट व लोअर में वक्त गुजर जाता है। ट्रैक शूट व जैकेट सर्दी से बचा लेती है।
सिर्फ साक्षात्कार के समय पहनते हैं टाई और कोट-पैंट
छात्रों के मुताबिक, कई छात्र अपने साथ कोट-पैंट व ब्लेजर लेकर जरूर आते हैं, लेकिन तैयारी के दौरान पूरा साल वह पीजी में रखा जाता है। सिविल सेवा के प्री और मेंस के बाद साक्षात्कार तक पहुंचने पर ही टाई के साथ कोट और पैंट या ब्लेजर पहना जाता है।
जो बच्चे शुरुआती तौर पर तैयारी करने आते हैं वे फैशन को लेकर अधिक प्रभावित रहते हैं। दो से तीन साल में वे परीक्षा के मूड में आ जाते हैं। यही वजह है कि यहां के लोगों का लोअर-टीशर्ट व ट्रैक सूट अपने आप में फैशन का हिस्सा है।
- अभिषेक, दिल्ली, आईआरएस सेवा के लिए चयनित छात्र
मैं अमूमन लोअर व टी-शर्ट में रहना पसंद करती हूं। ब्यूटी पार्लर से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। कोचिंग हो या लाइब्रेरी, हर जगह एक ही ड्रेस कोड चल जाता है। शादी-ब्याह में जाना नहीं होता तो खुद ही कई बार रेस्तरां में पहुंचकर अपनी पसंद का खाना खा लेती हूं।
- सुप्रिया, बिहार