महिला पत्रकार प्रिया रमानी मामले में कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकार ज्यादातर महिलाएं शर्म के कारण इसके बारे में नहीं बोलतीं। यदि महिला का यौन शोषण होता है, तो उसका आत्मविश्वास और उसकी गरिमा समाप्त हो जाती है।
कोर्ट ने आर्थिक सर्वे 2020-21 का हवाला देते हुए कहा कि 2018-19 में भारत के कार्यबल में पुरुषों की हिस्सेदारी 80.3 फीसदी के मुकाबले महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 26.5 फीसदी थी। कोर्ट ने महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सुरक्षित कामकाजी वातावरण देने का सुझाव दिया।
साक्ष्यों के आधार पर हो सुनवाई
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कोर्ट द्वारा महिला पत्रकार प्रिया रमानी को बरी किए जाने के तुरंत बाद कहा कि न्यायिक संस्थाओं को महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाना चाहिए। ईरानी ने फैसले पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि अभी उन्होंने कोर्ट का आदेश नहीं देखा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा, मैं न केवल राजनेता बल्कि एक महिला होने के नाते पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर बोल चुकी हूं कि प्रत्येक महिला को कानून का संरक्षण मिलना चाहिए।
महिला उत्पीड़न शर्मनाक
प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि के मामले को खारिज करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार पांडे ने कहा, रामायण और महाभारत की धरती पर महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा होना शर्मनाक है, जिनमें महिलाओं के सम्मान की सीख दी गई है।