नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र में कथित विसंगति से संबंधित मुद्दे पर केंद्र व अन्य संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। दरअसल एक महिला को टीके की पहली डोज देने के समय प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया जबकि उसे दूसरे डोज देने के बाद पहले डोज का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। याचिकाकर्ता जे. मंगलम नामक महिला का दावा है कि उसे कलावती सरन चिल्ड्रन हॉस्पीटल (केसीएच) में दूसरे वैक्सीन डोज पर प्रशासन द्वारा टीकाकरण की पहली खुराक के लिए प्रमाण पत्र जारी किया गया था। इस प्रकार दोनों डोज लेने के बावजूद वह इसका लाभ नहीं उठा सकती।
महिला ने कहा कि उसने 23 मार्च 21 को कोवाक्सिन की पहली डोज ली लेकिन उसने प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। इसके बाद उसने 3 मई को वैक्सीन की दूसरी डोज ली तो उसे पहला डोज लेने का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
केंद्र व अन्य की ओर से पेश अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने अदालत को बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वाधान में कोविन एप के माध्यम से वैक्सीन सर्टिफिकेट प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। अदालत ने उन्हें इस मामले की जांच करने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैयद हसन इस्फानी ने कहा कि याचिकाकर्ता और उनके पति दोनों को एक ही दिन टीका लगाया गया। संबंधित अस्पताल ने उन्हें बताया कि उन्हें टीकाकरण प्रमाण पत्र को डाउनलोड करने के लिए एसएमएस लिंक मिलेगा। दूसरे दिन जहां पति का टीकाकरण प्रमाण पत्र मिला, वहीं याची का प्रमाणपत्र नहीं मिला।
अस्पताल से पूछताछ करने पर उन्होंने उनकी शिकायतों को खारिज कर दिया। दूसरी खुराक के समय याचिकाकर्ता ने फिर से इस मुद्दे को डॉक्टर के समक्ष उठाने पर बताया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण देरी हुई है, उन्हें प्रमाण पत्र देने का आश्वासन दिया गया है।