आप नेता राघव चड्ढा द्वारा ट्वीट की गई यमुना की फोटो
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दिल्ली में हर साल गर्मियों में पानी किल्लत हो जाती है। इस साल भी हाल गंभीर है। दिल्लीवासी पीने के पानी को लेकर परेशना हैं और कई इलाकों में इसको लेकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। वहीं दिल्ली और हरियाणा सरकार के बीच पेयजल किल्लत को लेकर सियासत गर्म हो चुकी है। इसका खामियाजा लोगों को मांग के अनुरूप कम मिल रहे पानी से गुजारा कर भुगतना पड़ रहा है। लिहाजा, पेयजल आपूर्ति में 200 एमजीडी का अंतर बना हुआ है।
वर्तमान में दिल्ली की प्रतिदिन की मांग 1140 एमजीडी बनी हुई है, जबकि केवल 940 एमजीडी पानी ही उपलब्ध हो रहा है। इस वजह से दिल्ली वासियों के लिए 200 एमजीडी पानी की कमी बनी हुई है। दिल्ली में नौ जल शोधन केंद्रों से कुल 816 एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है। इसके अलावा चार शोधन केंद्रों से कुल 45 एमजीडी पानी को साफ किया जाता है। सबसे अधिक क्षमता हैदरपुर जल संयंत्र की है जो 220 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है। इसके अलावा सोनिया विहार 144, वजीराबाद 124, भगीरथी 100, चंद्रावल 98, द्वारका 50, नांगलोई 40, ओखला 20 व बवाना 20 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है।
इस तरह मिलता है दिल्ली को पानी
दिल्ली के अपने पास पानी के स्त्रोत की कमी है। यह 90 फीसदी पड़ोसी राज्यों पर निर्भर रहती है। इस वजह से उत्तर प्रदेश से गंग नहर से दिल्ली को कच्चा पानी प्राप्त होता है। इस पानी को भागीरथी व सोनिया विहार जल शोधक संयंत्र में साफ किया जाता है। दूसरी ओर, यमुना नदी और पश्चिम यमुना नहर से दिल्ली को हरियाणा से कच्चा पानी प्राप्त होता है। जो कि बाहरी इलाकों में शामिल पल्ला से दिल्ली की सीमा में प्रवेश करता है। इस पानी को जल बोर्ड के अन्य जल शोधक संयंत्र में शोधित किया जाता है।
पूर्व में उप-राज्यपाल भी मांग चुके हैं पानी पर रिपोर्ट
दिल्ली में गहराए पानी संकट को लेकर उप-राज्यपाल अनिल बैजल पूर्व में जल बोर्ड व एनडीएमसी अधिकारियों से पानी आपूर्ति की रिपोर्ट मांग चुके हैं। इसमें उन्होंने दिल्ली को मिलने वाले पानी व आपूर्ति को लेकर रिपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी पानी संकट को खत्म करने के लिए बातचीत की थी।