दिल्ली के 12 गांवों और हरियाणा के 17 गांवों के लोग महापंचायत में शामिल हुए। गांव वालों का कहना है कि उनकी तीन मांगें हैं- एक तरफ से सिंघू बॉर्डर खोलो, कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के लिए बैरिकेड्स नहीं लगाने चाहिए।
केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन जारी है। इस बीच करीब सात महीने से बंद सिंघु बॉर्डर को एक तरफ से खुलवाने के लिए रविवार को हरियाणा के सोनीपत के सेरसा में महापंचायत चल रही है।
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दिल्ली के 12 गांवों और हरियाणा के 17 गांवों के लोग महापंचायत में शामिल हुए। गांव वालों का कहना है कि उनकी तीन मांगें हैं- एक तरफ से सिंघू बॉर्डर खोलो, कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के लिए बैरिकेड्स नहीं लगाने चाहिए। किसानों ने कहा कि हम केंद्र और राज्य सरकारों से मिलेंगे।
वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने नई घोषणा करते हुए कहा कि अगर सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है तो हम राज्यपाल के माध्यम से अपनी बात कहेंगे। उन्होंने बताया कि 26 जून को किसान आंदोलन के कुछ प्रतिनिधि हर राज्य में राज्यपाल या उपराज्यपाल के पास जाएंगे। उन्हें अपनी मांगों की जानकारी देते हुए ज्ञापन देंगे और उनसे मिलेंगे। चूंकि कोरोना महामारी का समय है, इसलिए हर राज्य में केवल पांच-छह लोग ही राज्यपाल या उपराज्यपाल के पास जाएंगे।
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बता दें कि किसान आंदोलन के चलते कुंडली बॉर्डर पर बंद रास्ते को खुलवाने की मांग के लिए 20 जून को प्रस्तावित महापंचायत में भीड़ जुटाने के लिए गांवों में बैठक शुरू कर दी गई थी। शुक्रवार को नांगल कलां में बैठक कर समर्थन की मांग की गई थी।
गांव नांगल कलां में आयोजित बैठक में हेमंत नांदल ने बताया कि क्षेत्र के लोग बॉर्डर बंद होने के चलते लंबे समय से परेशान हैं। समस्याओं को दूर करने के लिए जांटी कलां में 20 जून को महापंचायत बुलाई गई थी। इसके लिए हरियाणा के साथ ही दिल्ली के गांवों से लोगों का भी समर्थन मिल रहा है। मंच के सदस्य रामफल सरोहा ने कहा कि लोग अपने गांवों में कैद होकर रह गए। प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा।