नई दिल्ली। दिल्ली में मंगलवार को ट्रैक्टर परेड के दौरान किसान आंदोलनकारियों की ओर से की गई हिंसा पर पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस ने सीसीटीवी व सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो व फुटेज जब्त की है। उनका विशलेषण कर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पहचान होने पर आरोपियों की गिरफ्तारी व कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि संलिप्तता पाए जाने पर किसी भी नेता को नहीं छोड़ा जाएगा। राष्ट्र का अपमान करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।
उन्होंने कहा कि 25 जनवरी को ही किसान नेता अपने वादे से मुकर गए थे। दिल्ली पुलिस ने संयम से काम लिया। इससे किसान आंदोलन के दौरान काफी लोगों की जान बच गई। हुड़दंग में काफी लोगों की जान जा सकती थी। उग्र प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर लाल किला पहुंच गए। लालकिले पर किसान संगठनों के अलावा धार्मिक झंडे फहराए गए। केस प्रॉपर्टी के रूप में इन झंडों को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने देश के अपमान को बहुत ही गंभीरता से लिया है। हिंसा में संलिप्तता पाए जाने पर किसी भी नेता को बक्शा नहीं जाएगा।
पांच राउंड हुई थी बातचीत
पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने बुधवार देर शाम प्रेसवार्ता कर कहा कि दिल्ली पुलिस को दो जनवरी को पता लगा कि संयुक्त किसान मोर्चा 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालना चाहता है। दिल्ली पुलिस ने मोर्चा के नेताओं के साथ पांच राउंड की बात की। पहले से 26 जनवरी को रैली निकालने से मना किया। जब किसान नेताओं ने जिद पकड़ ली तो केएमपी पर रैली निकालने और सुरक्षा, प्रबंधन व मीडिया कवरेज की आश्वासन दिया। इस पर नेता नहीं माने और दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने पर अड़े रहे। इसके बाद किसान नेताओं को सिंघु बॉर्डर, टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर से ट्रैक्टर रैली निकालने के तीन रूट दिए। पुलिस ने 37 शर्तों पर रैली निकालने की अनुमति दी। किसान नेता साथ चलने व पांच हजार से ज्यादा ट्रैक्टर नहीं होने की शर्त के साथ रैली को अनुमति दी गई। किसान नेताओं ने अंडरटेकिंग दी।
खुफिया विभाग फेल नहीं हुआ-
पुलिस आयुक्त ने कहा कि दिल्ली पुलिस का खुफिया विभाग फेल नहीं हुआ। दिल्ली पुलिस ने संयम बरता। पुलिस ने पाकिस्तान से चलाए जा रहे 308 ट्विटर हैंडल की पहचान की। इनमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचने के लिए पाकिस्तान से कहा जा रहा था। पुलिस ने जो इंतजाम किया था उनका नतीजा है कि किसी की जान नहीं गई। किसान नेताओं ने विश्वासघात किया है।