फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैसे होगा कोरोना पर वार : दिल्ली के कई गांवों में शुरू ही नहीं हुआ टीकाकरण

Wed, 19 May 2021 06:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

  • हरियाणा की सीमा से सटे गांव के लोग वैक्सीन लगवाने के लिए मार रहे है हाथ-पैर
  • कुछ गांव वाले टीके को लेकर संशय की स्थिति में
विज्ञापन
मुबारकपुर गांव में लॉकडाउन के कारण सन्नाटा - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी के अधिकतर गांवों में कोरोना दस्तक दे चुका है और गांवों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौत हो रही है। इस कारण ग्रामीण भयभीत हो गए है और अधिकतर गांवों के ग्रामीण कोरोना से पार पाने के लिए वैक्सीन लगवाने के लिए हाथ-पैर मार रहे है, लेकिन ज्यादातर ग्रामीणों से वैक्सीन दूर है और वे वैक्सीन लगवाने के लिए भटक रहे हैं। दरअसल सभी गांवों में डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं है और ग्रामीण इलाके में डिस्पेंसरियों में वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके अलावा वैक्सीन लगवाने के लिए उन्हें पंजीकरण कराने में भी

विज्ञापन

दिक्कत हो रही है।

दिचाऊं कलां गांव के समुंद्र सिंह बताते है कि कोरोना की रोकथाम के लिए एक भी कदम नहीं उठाया गया है। गांव में सैनिटाइजेशन का कार्य भी नहीं हुआ है, वहीं ग्रामीणों को वैक्सीन लगवाने में पंजीकरण कराने में भी दिक्कत हो रही है। वहीं इसी गांव के प्रदीप शौकीन के अनुसार कुछ दिनों के दौरान गांव में 20 से ज्यादा लोग मरने के बाद सरकारी स्कूल में वैक्सीन केंद्र बनाने के लिए एसडीएम से आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों को कोरोना से निजात दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उनके गांव में डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं है।

बापरौला निवासी डा. आरबी सोलंकी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक के बाद उनके गांव में वैक्सीन लगाने की शुरूआत हो गई है। इसी तरह गांव मदनपुर, माजरा डबास, अलीपुर गांव में भी वैक्सीन लगाना शुरू कर दिया है, मगर इन गांवों में आसपास के गांव एवं कालोनियों के लोग भी वैक्सीन लगवाने आ रहे है। इस कारण इन गांवों में डिस्पेंसरी में आने वाले समस्त लोगों को वैक्सीन नहीं लग पाती है।
विज्ञापन


झाड़ौदा कलां में वैक्सीन लगने की शुरूआत नहीं हुई है, जबकि इस गांव में करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव निवासी एडवोकेट ईश्वर सिंह डागर बताते है कि कोरोना महामारी से भयभीत है और वे वैक्सीन लगने की शुरूआत होने का इंतजार कर रहे है। वहीं सिरस पुर गांव के निवासी प्रवीन राणा ने बताया कि उनके गांव में वैक्सीनेशन सेंटर नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को वैक्सीन लगवाने के लिए आसपास के गांव बादली, शाहबाद, कादीपुर आदि में जाना पड़ता है। कई बार तो आसपास गांव में भी वैक्सीन नहीं लग पाती है। 

गोयला खुर्द गांव में वैक्सीन लगाने की आरंभ नहीं हुई है। ग्रामीण पवन नलवाटी ने बताया कि ग्रामीण द्वारका में वैक्सीन लगवाने जाते है, लेकिन गांव के अधिकतर लोग वैक्सीन से वंचित हैं। मुबारक पुर गांव निवासी विजेंद्र सिंह बताते है कि उनके गांव के लोग वैक्सीन लगवाने के लिए काफी सक्रिय हैं, परंतु कई बार वैक्सीन नहीं होती और बीच-बीच में छुट्टी के दिन काम ही नहीं होता है। इस कारण समस्त ग्रामीणों को वैक्सीन नहीं लग पा रही है।

ग्रामीणों में वैक्सीनेशन को लेकर संशय
ककरौला एवं नवादा गांव के ग्रामीणों में वैक्सीन को लेकर कई प्रकार के संदेह है। उनमें वैक्सीन को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। ककरौला गांव के नीरज का कहना है कि वैक्सीनेशन के कई दिन बाद उनके गांव के चार-पांच लोगों तबीयत बिगड़ और उनकी मौत हो गई। इस कारण ग्रामीण वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते। वे कोरोना से बचाव के लिए काफी अधिक सावधानी बरत रहे है। नवादा गांव में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण पुलकित ने बताया कि लोग वैक्सीनेशन के लिए आगे आने में हिचक रहे है। दरअसल उनके गांव में वैक्सीनेशन के बाद कुछ लोगों की मौत हो हुई हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस और उसकी वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में सवालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। इसके लिए सरकार और प्रशासन को लोगों के बीच और अधिक जागरूकता लाने की आवश्यकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें