कोरोना के खिलाफ निर्णायक जंग में टीकाकरण के दूसरे दिन दिल्ली में महज 3598 कर्मचारियों ने ही टीका लगवाया। इस दौरान 26 लोगों में वैक्सीन के हल्के दुष्प्रभाव नजर आए। एक मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लक्ष्य के मुताबिक सभी 81 केंद्रों पर 8136 कोरोना योद्धाओं का टीकाकरण होना था, लेकिन सोमवार को पहले दिन के 4319 के मुकाबले महज 3598 कर्मचारियों ने ही टीका लगवाया।
टीकाकरण कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला। इसके लिए दिल्ली के सभी 11 जिलों में 81 केंद्र बनाए गए। इनमें 75 दिल्ली सरकार के और निजी अस्पताल हैं। वहीं, 6 अस्पताल केंद्र सरकार के अधीन हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मध्य दिल्ली जिले में 9 केंद्रों पर 427 कर्मचारियों ने टीका लगवाया, पूर्वी दिल्ली में 5 केंद्रों पर 273, नई दिल्ली में 5 केंद्रों पर 196, उत्तरी जिले में 4 केंद्रों पर 118, उत्तर पूर्वी जिले में 2 केंद्रों पर 74, उत्तर पश्चिमी जिले मेें 10 केंद्रों पर 538, शाहदरा जिले में 6 केंद्रों पर 163, दक्षिणी जिले में 7 केंद्रों पर 333, दक्षिणी पूर्वी जिले में 8 केंद्रों पर 420, दक्षिणी पश्चिमी जिले में 9 केंद्रों पर 388 और पश्चिमी जिले में 10 केंद्रों पर 429 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने टीके लगवाए। 595 लोगों को कोवाक्सीन लगवानी थी, लेकिन आधे कर्मचारी भी नहीं पहुंचे। सबसे अच्छा प्रदर्शन उत्तर पूर्वी जिले का रहा, जहां सिर्फ दो केंद्रों पर ही 74 लोगों ने टीके लगवाए।
एम्स में महज आठ कर्मियों ने लगवाया टीका
कोरोना टीकाकरण के दूसरे दिन सोमवार को देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। यहां महज आठ कर्मचारियों ने ही कोरोना का टीका लगवाया है। इन कर्मचारियों में भी अधिकतर सुरक्षा गार्ड और चतुर्थ श्रेणी वाले हैं। बिस्तरों के लिहाज से अस्पताल की तुलना करें तो दिल्ली एम्स एकमात्र ऐसा संस्थान है, जहां पूरे देश में सबसे कम स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगा है। एम्स में आठ और सफदरजंग अस्पताल में 20 कर्मचारियों को कोवाक्सीन की डोज दी गई है।
दक्षिणी दिल्ली जिला प्रशासन के अनुसार एम्स और सफदरजंग अस्पताल में सोमवार को 200 स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोवाक्सीन की डोज देनी थी, लेकिन दोनों संस्थानों को मिलाकर 28 कर्मचारी ही डोज ले सके। दिल्ली में केंद्र सरकार के छह अस्पताल हैं और सभी जगह भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवाक्सीन टीका दिया जा रहा है। इन अस्पतालों में 595 स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगना था, लेकिन 50 फीसदी से कम यानि केवल 239 स्वास्थ्य कर्मचारी ही आगे आए।
हालांकि एक भी व्यक्ति में दुष्प्रभाव का मामला सामने नहीं आया है। बावजूद इसके स्वास्थ्य कर्मचारी टीका लगवाने के लिए आगे आने से कतरा रहे हैं। नई दिल्ली जिला प्रशासन के अनुसार आरएमएल अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 195 स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाने का लक्ष्य था, जबकि शाम तक 146 कर्मचारियों को ही लग सका। ठीक इसी तरह रोहिणी ईएसआई अस्पताल में 100 में से 37 और दूसरे ईएसआई अस्पताल में केवल 28 लोगों ने ही टीका लगवाया है। फिलहाल इस मामले में एम्स प्रबंधन ने भी चुप्पी साध ली है। एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और प्रवक्ता डॉ. आरती विज से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन टीकाकरण कम होने के पीछे के मुख्य कारण सामने नहीं आ सके।