नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बिना ठोस तथ्यों के 40 इमारतों को गैरकानूनी बताने वाली याचिका को ब्लैकमेलिंग याचिका करार दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये जुर्माना लगा दिया। इतना ही नहीं अदालत ने सड़क पर निर्माण सामग्री के आधार पर अवैध निर्माण बताने वाली एक अन्य याचिका को भी खारिज करते हुए याची पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने प्रेरणा एक दिशा फाउंडेशन एनजीओ द्वारा दक्षिणी दिल्ली के देवली में अनाधिकृत निर्माण का हवाला देकर 40 इमारतों को तोड़ने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिका में संबंधित भवन मालिकों को पक्ष नहीं बनाया। वहीं ऐसा कोई तथ्य पेश नहीं किया कि निर्माण अवैध है।
खंडपीठ ने कहा कि किसी निर्माण की वैधता या अवैधता को साबित करने के लिए कड़े और ठोस सबूत की जरूरत होती है। ऐसा लगता है कि याचिका मात्र ब्लैकमेलिंग के लिए है। ऐसे में वे याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाते हैं। अदालत ने उसे जुर्माने की राशि दिल्ली लीगल सर्विस अथारिटी में जमा करवाने का निर्देश दिया है।
वहीं दूसरी याचिका में सड़क पर पड़ी ईट, बालू, छड़ें आदि का फोटो दिखाकर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई थी। खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने निर्माण की वैधता पर कोई दलील नहीं दी और निर्माण सामग्री सड़क पर पड़ी होने का मतलब अवैध निर्माण होना नहीं होता है।
अदालत ने कहा कि निर्माण सामग्री का पड़ा होना निर्माण की अवैधता का अनुमान नहीं हो सकता है। निर्माण की वैधता को तस्वीरों से आंका नहीं जा सकता है। ऐसे में कार्रवाई आदेश देने से यह संदेश जाएगा कि सड़क पर निर्माण सामग्री है तो अवैध निर्माण है। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए याची पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया।