पश्चिम विहार के एक्शन बालाजी अस्पताल में बड़ा हादसा...
-पश्चिम विहार स्थित एक्शन बालाजी अस्पताल में हुआ हादसा, सफाई के लिए आए थे दोनों
-ठेकेदार से पुलिस कर रही पूछताछ, मेडिकल बोर्ड आज करेगा पोस्टमार्टम, मामला दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पश्चिम विहार स्थित एक्शन बालाजी अस्पताल अस्पताल के बेसमेंट में कार्बन वेस्ट ट्रीटमेंट टैंक की सफाई के लिए उतरे दो मजदूर जहरीली गैस से अचेत हो गए। दोनों को निकालकर अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया गया। उनकी शिनाख्त यूपी के हरदोई स्थित गांव दुआ खेड़ा निवासी बृजेश (26) और विक्रम (30) के रूप में हुई है। क्राइम टीम के अलावा एफएसएल के एक्सपर्ट ने घटना स्थल का मुआयना किया। शुरुआती जांच में पता चला कि बिना सुरक्षा उपकरणों के दोनों मजदूरों को टैंक की सफाई के लिए उतार दिया गया। पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर लिया है।
बताया जा रहा है कि कार्बन वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अस्पताल ने किसी ठेकेदार को जिम्मा दिया था। पुलिस ठेकेदार से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। अस्पताल प्रशासन से भी पूछताछ की जा रही है। बृहस्पतिवार को मेडिकल बोर्ड दोनों के शवों का पोस्टमार्टम करेगा। पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने बताया मंगलवार शाम 6:45 बजे उनकी टीम को हादसे की सूचना मिली। अस्पताल के बेसमेंट में कार्बन वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट के 4-5 टैंक बने हैं। अस्पताल का वेस्ट यहां पहुंचता है। पूछताछ में पता चला ठेकेदार के जरिए मादीपुर से इन मजदूरों को लाया गया था। पहले बृजेश सफाई के लिए उतरा, लेकिन अंदर पहुंचते ही वह अचेत हो गया। हलचल न होने पर कुछ ही देर बाद विक्रम अंदर गया तो वह भी अचेत हो गया। गड़बड़ होने की आशंका होने पर अस्पताल की रखरखाव टीम के लोग सुरक्षा उपकरणों के साथ अंदर गए। इसके बाद दोनों को बाहर निकाला गया। सूचना पर पुलिस और दमकल विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एसटीपी के संचालन और रखरखाव का जिम्मा फ्रेंड्स एनवायरो इंजीनियर्स के पास है। उसके कर्मचारी वृजेश और विक्रम एक्टिवेटेड कार्बन फ़िल्टर की सर्विसिंग के लिए उतरे थे।
सुरक्षा उपकरणों के बिना अंदर भेजना लापरवाही
दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कार्बन वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में जहरीली गैस होने की 100 फीसदी संभावना रहती है। ऐसे में बिना सुरक्षा उपकरणों के उनको अंदर भेजना गंभीर लापरवाही है। अमूमन ऐसे टैंक में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फाइड, अमोनिया या हाईड्रोजन सल्फाइड समेत कई अन्य गैस हो सकती है। इनकी चपेट में आकर मौत हो जाती है। सरकार ने भी ऐसे टैंक में बिना सुरक्षा उपकरणों के उतरने पर पाबंदी लगाई हुई है।
नहीं जारी किया गया था वर्क परमिट
दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस तरह के काम के लिए वर्क परमिट अनिवार्य होता है। यह अस्पताल के मेंटेनेंस विभाग की ओर से कर्मचारियों के लिए जारी किया जाना चाहिए। लेकिन मौके पर जब बाकी मजदूरों से पूछा गया तो उन्होंने वर्क परमिट जारी नहीं होने की बात की। वर्क परमिट जारी होने पर टैंक में उतरने से पहले सुरक्षा प्रोटाकाल का पालन किया जाता।
मजदूरों ने अस्पताल के बाहर किया प्रदर्शन
दोनों मजदूरों की मौत के बाद अस्पताल के बाहर बाकी मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इन लोगों ने मामले की जांच कराने व हादसे का शिकार हुए दोनों मजदूरों के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। आरोप है कि दोनों मजदूरों ने सुरक्षा उपकरणों की मांग की थी, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। पुलिस ने समझा-बुझाकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को वापस भेजा।