-पर्यावरण मंत्री ने डीपीसीसी को सौंपी जमीन तलाशने, तकनीक और क्षमता तय करने की जिम्मेदारी
-छोटे क्लीनिकों को राहत, कचरा निपटान की दरें घटाने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में बायोमेडिकल कचरे के निपटान के लिए दो नए अत्याधुनिक प्लांट तैयार किये जाएंगे। इसके लिए दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को जमीन तलाशने, तकनीक और इसकी क्षमता तय करने की जिम्मेदारी दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिदर सिंह सिरसा ने काम तेज करने की सलाह दी है।
पर्यावरण मंत्री ने डीपीसीसी के अधिकारियों के साथ बैठक कर कई अहम निर्णय लिये हैं। उन्होंने छोटे क्लीनिकों के लिए कचरा निपटान की दरें कम करने का प्रस्ताव भी तैयार करने को कहा है। इससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली में मौजूदा समय आधा-आधा एकड़ में बने दो प्लांट हरदिन करीब 40 टन कचरे का निपटान करते हैं। इनमें करीब 10,000 स्वास्थ्य केंद्रों से कचरा आता है। ये दिल्ली की जरूरतों के लिहाज से बहुत कम है। मंत्री ने बताया कि करीब 3 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले दिल्ली में मात्र दो ही प्लांट हैं, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में 11 प्लांट हैं। दिल्ली सरकार इस कमी को दूर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि नए प्लांट आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल होंगे।
छोटे क्लीनिकों को राहत देने की तैयारी
मंत्री ने छोटे गैर-बेड वाले छोटे क्लीनिकों के लिए कचरा निपटान की दरों को तर्कसंगत बनाने का भी आदेश दिया है। उन्होंने कहा ये क्लीनिक बड़े अस्पतालों जितना शुल्क दे रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य निदेशालय (डीजीएचएस) से इस पर प्रस्ताव तैयार करने को कहा है और स्वास्थ्य मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह से इस मुद्दे पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है।
डीपीसीसी कचरे की करेगा मॉनिटरिंग
डीपीसीसी और स्वास्थ्य विभाग को कचरे के संग्रह, परिवहन और निपटान की रोजाना रिपोर्ट देने को कहा गया है। मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि बायोमेडिकल कचरे पर नजर रखने से जवाबदेही बढ़ेगी और तुरंत सुधार होगा। इसके अलावा, अस्पतालों को बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। मंत्री ने बताया, हाल ही में 20 अस्पतालों को उनके बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि नए प्लांट, कम दरें और जागरूकता से दिल्ली को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में मदद मिलेगी।