सर्वाइकल प्री-कैंसर के इलाज और नई वैक्सीन की तकनीक भारतीय कंपनियों को सौंपी
सर्वाइकल प्री-कैंसर के इलाज और नई वैक्सीन की तकनीक सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
ई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने सर्वाइकल प्री-कैंसर के संभावित इलाज और नई वैक्सीन तकनीकों का लाइसेंस भारतीय दवा कंपनियों को सौंपा है। इस कदम से देश में सस्ती और स्वदेशी दवाएं व वैक्सीन उपलब्ध होने की उम्मीद है।
शेता दो नामक सर्वाइकल प्री-कैंसर इलाज का लाइसेंस एमक्योर फार्मास्युटिकल्स को दिया गया है। यह तकनीक एचपीवी संक्रमण से होने वाले सर्वाइकल इंट्राएपिथेलियल नियोप्लासिया का इलाज करती है। शेता दो केवल संक्रमित कोशिकाओं को खत्म करती है, स्वस्थ कोशिकाओं को नहीं। यह महिलाओं के लिए सुरक्षित विकल्प बन सकती है। इसके अतिरिक्त, आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस, कोलकाता ने दो वैक्सीन तकनीकें विकसित की हैं। इनका लाइसेंस बायोलॉजिकल ई को मिला है। इनमें टाइफाइड और अन्य पेट के संक्रमणों (पैराटाइफाइड, शिगेला) से बचाव की वैक्सीन शामिल हैं। ये संक्रमण बच्चों में गंभीर दस्त का कारण बनते हैं।आईसीएमआर के महानिदेशक राजीव बहल ने कहा कि शोध संस्थानों और दवा कंपनियों के सहयोग से नई तकनीकें मरीजों तक तेजी से पहुंचेंगी। इससे भारत में स्वदेशी स्वास्थ्य तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, आयातित तकनीकों पर देश की निर्भरता भी कम होगी। यह पहल सरकारी शोध को आम लोगों के लिए उपयोगी उत्पादों में बदलने का लक्ष्य रखती है।