नई दिल्ली। गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के बीच बिना ड्राइवर का ट्रैक्टर मिठास घोल रहा है। इस ट्रैक्टर को जूस निकालने में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक कोल्हू से जोड़ चलाकर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद कोल्हू में गन्ने डालकर ताजा व मीठा रस निकालकर किसानों को पिलाया जा रहा है।
दिल्ली में गर्मी दस्तक दे चुकी है। चढ़ते पारे के साथ किसानों ने भी अपने रहन-सहन में बदलाव शुरू कर दिया है। सर्दी में किसानों ने पारंपरिक गीजर का सहारा लिया था तो अब गर्मी से मुकाबले के लिए गन्ने के रस का इंतजाम किया है। इसके लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गन्ने से भरी ट्रॉलियां रोज बॉर्डर पर पहुंच रही हैं।
आंदोलकारी किसान वेदप्रकाश ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की पैदावार शुरू से ही अधिक रही है। गर्मी से निपटने के लिए भी गन्ने को अधिक कारगार माना जाता है। इसीलिए दिल्ली की गर्मी का मुकाबला करने के लिए यहां कोल्हू का इंतजाम किया गया है।
एक अन्य किसान सुरजीत यादव ने कहा कि गांव के परिवेश में गन्ने के रस के लिए अब भी कोल्हू का प्रयोग किया जाता है। यही वजह है कि पुराने कोल्हू को यहां लगाया गया है। ट्रैक्टर में सुबह डीजल डाल दिया जाता है। इसके बाद इसे दोपहर भर इस्तेमाल कर गन्ने का रस निकाला जाता है।
बॉर्डर पर गर्मी से निपटने के लिए अन्य इंतजाम भी चल रहे हैं। पंखे लगाने के साथ ही पानी डालकर टेंट को ठंडा किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि धूप की तपिश के कारण कपड़े के टेंट में गर्मी का अहसास ज्यादा हो रहा है। इसको देखते हुए फर्राटा पंखा भी लगाया जा रहा है। गर्मी बढ़ने से पानी की मांग भी बढ़ रही है। पानी की अधिक बोतलें मंगाई जा रही हैं।