नई दिल्ली। हौजखास थाना पुलिस ने बिना जांच के कोरोना की फर्जी रिपोर्ट बनाने के आरोप में एक डॉक्टर और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया है। रूस से एमडी आरोपी डॉक्टर नमूनों का संग्रह कर नामचीन लैब के नाम पर फर्जी रिपोर्ट बनाता था। इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ, जब उसने एक टेस्ट रिपोर्ट में पीड़ित के नाम की गलत स्पेलिंग लिख दी। आरोपी अब तक करीब 75 लोगों की फर्जी रिपोर्ट बना चुका ह्रै।
दक्षिण जिला डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर के अनुसार हौजखास में प्लेसमेंट एजेंसी चलाने वाले अलाउद्दीन अंसारी ने पुलिस को 30 अगस्त को शिकायत दी कि वह मरीजों को नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराता है। स्टाफ भेजने से पहले उसने डॉक्टर कुश बिहारी पाराशर से दो नर्स का कोरोना टेस्ट कराने को कहा। डॉ. पारासर ने दोनों नर्स की रिपोर्ट नेगेटिव बताई और रिपोर्ट ंअलाउद्दीन के व्हाट्सएप पर भेज दी। रिपोर्ट डॉक्टर ने सहयोगी अमित के साथ मिलकर बनाई थी। रिपोर्ट बनाते समय एक नर्स के नाम की स्पेलिंग गलत थी। शिकायतकर्ता नर्स के नाम को ठीक कराने उसी लैब में गया जिसके नाम पर रिपोर्ट बनाई गई थी। लैब में चैक किया गया तो पता लगा कि यहां इस नाम से कोई कोरोना टेस्ट हुआ ही नहीं। मामला दर्ज कर हौजखास थानाध्यक्ष अक्षय कुमार की देखरेख में एसआई वरुण गुलिया की टीम ने जांच शुरू की। टीम ने जांच के बाद डा. कुश बिहारी पाराशर (34), उसके साथी अमित सिंह व ड्राइवर सोनू कुमार को गिरफ्तार कर लिया। मालवीय नगर में रहने वाले डा. पाराशर ने बताया कि वह ज्यादातर दक्षिण व पश्चिमी दिल्ली के लोगों को अपना शिकार बनाते थे। जांच में यह बात सामने आई है कि जब कोई पीड़ित इनसे संपर्क करता था तो ये सैंपल तो कलेक्ट करवा लेते थे, मगर बिना जांच किए ही कोरोना टेस्ट की फर्जी रिपोर्ट बना देते थे। कुश पाराशर ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि ेवह अब तक करीब 75 लोगों की फर्जी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट बना चुका है।