राजधानी में कोरोना का मरीज मिलने के बाद राज्य व केंद्र सरकार ने सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा है। अस्पतालों में भी पर्याप्त इंतजाम होने का दावा दोनों सरकार कर रही हैं ,लेकिन बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला ने दो बड़े अस्पतालों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। केंद्र सरकार के इन दोनों ही अस्पतालों में कोरोना वायरस को लेकर डॉक्टर, मरीज और अन्य स्टाफ में वो गंभीरता देखने को नहीं मिली जिसे लेकर केंद्र सरकार पिछले 46 दिन से बेचैन है। इन अस्पतालों में कोरोना की जांच के लिए कोई विशेेष वार्ड नहीं बनाया गया है।
जहां है आपात मरीज, वहीं बना दिया कोरोना मरीजों का कमरा
लेडी हार्डिंग अस्पताल में इस कदर लापरवाही बरती जा रही है कि आपात मरीजों को देखने वाले वार्ड में ही कोरोना वार्ड केे नाम का पर्चा चिपकाया है। कोरोना के लिए जहां बेड हैं, वहीं पर आपात मरीजों का इलाज भी हो रहा है। आपातकालीन वार्ड में ही आइसोलेशन कमरा बना दिया। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अगर यहां कोरोना वायरस का कोई संदिग्ध मरीज जांच कराने आता है तो क्या उससे बाकी मरीजों को खतरा नहीं होगा? इस सवाल का वहां मौजूद डॉक्टरों ने कोई जवाब ही नहीं दिया। लेडी हार्डिंग अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
यहां खुले में ही कर रहे कोरोना की जांच
आरएमएल अस्पताल में बीते दो दिन से प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी बड़ी संख्या में कोरोना वायरस की जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इनकी जांच के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से इमरजेंसी के बाहर काउंटर लगा दिया लेकिन हैरानी की बात कि जांच के लिए कोई अलग जगह तय नहीं की गई है। अस्पताल में आने वाले अन्य मरीजों और परिजनों के बीच ही इनकी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रशासन को इनकी जांच के लिए अलग जगह ढूंढने में काफी परेशानी हो रही है क्योंकि अस्पताल के ज्यादातर हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में यदि इनमें से भी कोई व्यक्ति कोरोना पॉजीटिव पाया जाता है तो दूसरे लोगों को भी इससे काफी खतरा हो सकता है।
अभी तलाश रहे हैं जगह : तिवारी
आरएमएल अस्पताल की प्रवक्ता स्मृति तिवारी का कहना है कि अस्पताल में कोरोना मरीजों की जांच के लिए अलग जगह की तलाश की जा रही है और जल्द ही इसकी व्यवस्था ऐसी जगह पर की जाएगी जहां अन्य मरीज या परिजन न जा सकें।