राजधानी की सड़कों पर लटकते बिजली के तारों को खत्म करने और 24x7 निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए सरकार ने मिशन 2030 लॉन्च किया है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इस महायोजना पर सरकार कुल 17,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बिजली की लाइनें पूरी दिल्ली में जमीन के नीचे बिछाई जाएंगी। बिजली आपूर्ति को हाई-टेक बनाने के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक अपनाई जाएगी।
मिशन 2030 में निवेश और लक्ष्य
17,000
करोड़ रुपये
कुल बजट
1426.27
करोड़ रुपये पिछले 1 साल में हुए खर्च
सर्वाधिक खर्च वाली टॉप 3 विधानसभाएं
छतरपुर (160.2 करोड़)
किरारी (95.32 करोड़)
मुंडका (65.55 करोड़)
2031 तक 13 हजार मेगावाट बिजली की होगी जरूरत
बिजली मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार से उन्हें जर्जर व्यवस्था विरासत में मिली थी, जहां कई ट्रांसफार्मर 25 साल की उम्र पूरी कर चुके थे। अब भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है। अनुमान है कि दिल्ली में 2026-27 में बिजली की मांग 9,000 मेगावाट और 2030-31 तक बढ़कर 13,114 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। इस बढ़ती मांग को झेलने के लिए सरकार ग्रिड सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी कर रही है।सिंगापुर की तर्ज पर सालाना बिजली कटौती को न्यूनतम स्तर पर लाने की तैयारी
बेहतरीन शहरों में शुमार होगी दिल्ली: सूद
ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बिजली कटौती को खत्म करना है, बल्कि वोल्टेज की समस्या को दूर करना और डिजिटल मीटरों के जरिए पारदर्शी बिलिंग सुविधा देनी है। इस निवेश के बाद दिल्ली का बिजली मॉडल दुनिया के बेहतरीन शहरों में शुमार होगा।
हरिनगर और अन्य इलाकों के लिए खास तैयारी
मिशन 2030 के तहत हर विधानसभा के लिए माइक्रो-प्लान तैयार है। हरिनगर में अगले तीन वर्षों में करीब 222.3 करोड़ रुपये के अतिरिक्त काम होने हैं, जिसमें 102 नए ट्रांसफार्मर और 62.5 किलोमीटर लंबी नई एलटी लाइनें बिछाई जाएंगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और घरों की छतों पर सोलर पैनल (पीएम सूर्या घर योजना) लगाने के लिए भी ग्रिड की क्षमता बढ़ाई जा रही है, ताकि भविष्य में लोड बढ़ने पर बिजली ट्रिप न हो।