ठगी के लिए मलयेशिया और वियतनाम के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तरी जिले की साइबर थाना पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर मास्टरमाइंड व उसकी प्रेमिका को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह व्हाट्सएप के जरिए संपर्क कर लोगों को ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित अन्य देशों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करता था।
जालसाज ठगी के लिए मलयेशिया और वियतनाम के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने बताया कि आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के एटा स्थित गांव नंगला गालू निवासी सहदेव सिंह और एटा के गांव पिलुआ उसकी प्रेमिका के रूप में हुई है। पुलिस ने इनसे 2 मोबाइल, 3 पासबुक, 3 चेकबुक, 2 डेबिट कार्ड, 5 भारतीय और 3 वियतनाम के सिम कार्ड्स बरामद किए हैं। पुलिस ने इनके बैंक खाते फ्रीज करा दिए और पीड़ित के 78,920 रुपये भी होल्ड करा दिए हैं। बुराड़ी निवासी धर्मेंद्र ने 6 सितंबर को पुलिस को शिकायत दी थी कि उन्होंने सिंगापुर से टूरिज्म मैनेजमेंट का कोर्स किया था। इसके बाद धर्मेंद्र ने एक व्हाट्सएप ग्रुप वर्क इंफॉर्मेशन के जरिए नौकरी की तलाश शुरू की। इसी ग्रुप में मयंक पांडे नाम के व्यक्ति ने उन्हें वियतनाम के रास्ते ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने के लिए कहा। आरोपी ने पीड़ित से वियतनाम के वीजा के लिए 10 हजार रुपये ले लिए। पीड़ित वीजा मिलने पर वियतनाम पहुंचा। इसके बाद आरोपियों ने ऑस्ट्रेलियाई वीजा के लिए बैंक बैलेंस दिखाने का बहाना बनाकर पीड़ित से 3 हजार डालर यानि (करीब 3.12 लाख रुपये) की मांग की। पैसे ट्रांसफर होते ही आरोपियों ने धर्मेंद्र को ब्लॉक कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर व्हाट्सएप चैट, जीपीएस लोकेशन और बैंक खातों की जांच की। पुलिस को जांच में आरोपियों की लोकेशन एटा की मिली। इसके बाद सहदेव सिंह व उसकी प्रेमिका को गिरफ्तार किया।
प्रेमिका के खाते में ट्रांसफर कराए थे पैसे
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मास्टरमाइंड सहदेव है। उसने बताया कि वह रोजगार की तलाश में वियतनाम गया था लेकिन काफी दिनों तक उसे नौकरी नहीं मिली। वियतनाम में उसकी मुलाकात एक एजेंट विजय से हुई, जो लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठग रहा था। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपी मलयेशिया और वियतनाम के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते थे। यहां पर अलग-अलग नामों से पीड़ितों से संपर्क करते थे। जब ठगी के पैसे आरोपियों के खाते में आ जाते थे तो पीड़ित का नंबर ब्लाॅक कर देते थे। सहदेव सिंह ने धर्मेंद्र के पैसे अपनी प्रेमिका के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए थे। फिर उस पैसे को अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया। आरोपी सहदेव सिंह ही प्रेमिका के परिवार का खर्च उठाता था।