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सरकार को दो टूक, कानून वापस लेने के तरीके पर होगी वार्ता

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के साथ वार्ता से एक दिन पहले किसान संगठनों से स्पष्ट किया है कि बुधवार की बातचीत तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के तरीके पर होगी। बिना इसकी प्रक्रिया तय हुए किसी दूसरे मुद्दे पर किसान प्रतिनिधि चर्चा नहीं करेंगे। मोर्चा ने मंगलवार को अपना प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। इसमें उन्हीं मसलों का जिक्र है, जिनका प्रस्ताव किसान संगठनों ने पहले भी केंद्र सरकार को दिया था।
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केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से सोमवार को भेजे गए पत्र के जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने लिखा है कि वह बुधवार दोपहर 2 बजे सरकार से वार्ता का प्रस्ताव स्वीकार कर रहे हैं। साथ ही याद भी दिलाया है कि जिन मसलों पर चर्चा करने का प्रस्ताव उन्होंने अपने पिछले पत्र में दिया था, उन्हीं पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इसमें तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का तरीका, एमएसपी की कानूनी गारंटी, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अध्यादेश में संशोधन व विद्युत संशोधन विधेयक की वापसी शामिल हैं। मोर्चा का मानना है कि प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए जरूरी होगा कि वार्ता इसी एजेंडा के अनुसार चले।
सोमवार को केंद्रीय सचिव ने किसान संगठनों को पत्र भेजकर वार्ता की तारीख 30 दिसंबर दोपहर 2 बजे तय करने का कहा था। साथ ही लिखा था कि बातचीत तीनों कृषि कानूनों, एमएसपी, वायु गुणवत्ता प्रबंधन अध्यादेश व विद्युत संशोधन विधेयक पर होगी। किसान संगठनों का मानना है कि सरकार अपना एजेंडा अस्पष्ट रखकर एक बार फिर बातचीत को अधर में लटकाए रखना चाहती है। किसान संगठन कृषि कानून पर नहीं, इसको वापस लेने के तरीके पर वार्ता करना चाहते हैं। केंद्र सरकार के दूसरे एजेंडे भी इसी तरह अस्पष्ट हैं, जबकि किसान संगठन अपने एजेंडे पर टिके हुए हैं।
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संयुक्त किसान मोर्चा के प्रस्ताव के चार एजेंडे, जिस पर बातचीत करने का प्रस्ताव
1. तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द/निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि।
2. सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान।
3. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश-2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधान से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं।
4. किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक-2020 के मसौदे को वापिस लेने की प्रक्रिया।
‘सरकार खुले मन से वार्ता करती है तो ही सकारात्मक परिणाम’
भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के प्रदेेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधि वार्ता में शामिल होंगे। चार प्रस्ताव पर चर्चा होगी। अगर सरकार खुले मन से वार्ता में शामिल होती है तो सकारात्मक परिणाम होंगे। हालांकि अभी भी किसानों को वार्ता की सफलता से बहुत अधिक उम्मीद नहीं है, बावजूद इसके किसान सरकार से बातचीत में शामिल होंगे। किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने कहा कि सरकार से बातचीत में कोई समाधान निकल सकता है, लेकिन सरकार कितने खुले मन से बातचीत करती है, इस पर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
पंजाब के विद्यार्थियों से आंदोलन में जुड़ने का आह्वान
किसान नेता दर्शनपाल ने सोशल मीडिया के जरिये पंजाब के युवाओं, खासकर विद्यार्थियों से अपील की है कि किसानों के आंदोलन में ज्यादा से ज्यादा शामिल हों। उन्होंने कहा कि युवाओं का अभी भी समर्थन है, लेेकिन एक अलग बैनर तले आंदोलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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