हंगामे व बहिष्कार के बीच दिल्ली विद्यालय शिक्षा विधेयक-2025 पेश
विधेयक बच्चों और अभिभावकों को राहत देने वाला ऐतिहासिक प्रयास : आशीष सूद
आतिशी बोलीं-सरकार ने संशोधन नहीं किया तो आप सड़कों पर उतरेगी, कोर्ट जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधानसभा में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने नोकझोंक व आम आदमी पार्टी के हंगामे व बहिष्कार के बीच बहुप्रतीक्षित दिल्ली विद्यालय शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक-2025 पेश किया। इसे भाजपा सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। मंत्री सूद ने कहा कि यह विधेयक दिल्ली के करोड़ों बच्चों और लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला ऐतिहासिक प्रयास है। वहीं विधेयक को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने दो टूक कहा कि अगर सरकार ने इसमें संशोधन नहीं किया तो आप सड़कों पर उतरेगी और कोर्ट का रुख भी करेगी।
मंत्री सूद ने सदन में अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि वह एक ऐसे मसले का समाधान लेकर आए हैं जिसे दशकों तक नजरअंदाज किया गया। शिक्षा पैसा कमाने का जरिया नहीं राष्ट्र निर्माण का माध्यम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ प्रशासनिक दस्तावेज नहीं बल्कि डॉ. मुखर्जी के विजन और मातृभूमि के भविष्य के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मंत्री ने कहा कि यह विधेयक बॉटम-अप अप्रोच पर आधारित है जिसमें पहली बार अभिभावकों को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है।
विधेयक सोचा समझा फर्जीवाड़ा : आतिशी
नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विधेयक को सोचा समझा फर्जीवाड़ा करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने अप्रैल से जुलाई तक बिल जानबूझकर टालकर प्राइवेट स्कूलों को फीस बढ़ाने का समय दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल में न तो फीस वापसी का प्रावधान है न ही स्कूलों के खातों के ऑडिट की व्यवस्था। उन्होंने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने और फाइनल होने तक पिछली साल की फीस को फ्रीज करने की मांग की। विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर तीखी नोकझोंक हुई और आम आदमी पार्टी ने विधेयक को पैरेंट्स विरोधी बताते हुए सदन से बहिष्कार किया।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
दिल्ली के सभी निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कानून लागू होगा।
स्कूलों को तीन वर्षों की फीस प्रस्तावित कर पहले ही दाखिल करनी होगी जिसे केवल एक बार संशोधित किया जा सकेगा।
तीन स्तरों पर रेगुलेटरी व अपील कमेटियों का गठन किया जाएगा।
मुनाफाखोरी रोकने के लिए सख्त मापदंड तय किए गए हैं और वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
गैरकानूनी वृद्धि पर एक से 10 लाख रुपये जुर्माना। छात्र को अपमानित करने या नाम काटने पर 50,000 रुपये प्रति छात्र दंड।
लगातार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता रद्द करने या संचालन सरकार द्वारा करने का भी प्रावधान।