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आतंकी फंडिंग : इंजीनियर रशीद की जमानत पर फैसला सुरक्षित

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को आतंकी फंडिंग मामले में सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित किया है, जिनमें दो संरक्षित गवाह भी शामिल हैं जो मुकर गए हैं। हालांकि, रशीद के वकील ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि गवाहों का उनके साथ गहरा पेशेवर संबंध था और उन्होंने संबंधित अवधि का अधिकांश समय हिरासत में बिताया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ के समक्ष यह दलीलें दी गईं, जिसने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि अब तक परीक्षण किए गए गवाहों के बयानों से संकेत मिलता है कि तीन विशिष्ट गवाह रशीद से प्रभावित हुए थे। उन्होंने दलील दी कि कम से कम दो संरक्षित गवाह मुकर गए हैं। लूथरा ने यह भी कहा कि रशीद ने भारत के खिलाफ विशिष्ट भाषण दिए और भारत विरोधी गतिविधियों का समर्थन किया।
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लूथरा ने रशीद के खिलाफ पारित जमानत आदेशों के विवरण का हवाला देते हुए कहा कि अपीलकर्ता (रशीद) के प्रभाव को देखते हुए वे जमानत पाने के योग्य नहीं हैं। एनआईए के वकील ने आगे आरोप लगाया कि जब रशीद को अपने बीमार पिता से मिलने के लिए जमानत दी गई थी, तब उन्होंने कुछ गवाहों से मुलाकात की थी। अदालत ने पहले नोट किया था कि रशीद लगभग सात वर्षों से हिरासत में हैं। इसने यह भी देखा था कि इस मामले में कुल 240 गवाह हैं और मुकदमे को पूरा होने में काफी समय लगेगा। रशीद को पहले अपने पिता के निधन से जुड़े समारोहों में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी।
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