नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने और उनकी बीट से फैलने वाली बीमारियों का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। इस मामले में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने एनजीटी को बताया है कि कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगाने या उनकी बीट की सफाई कराने की कार्रवाई उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
डीपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें मुंबई में सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगाने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया था। एनजीटी के निर्देश पर डीपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसका काम केवल वायु, जल और अन्य प्रकार के प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण करना है। पक्षियों का प्रबंधन करना या सार्वजनिक स्थानों पर उन्हें दाना खिलाने से रोकना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। डीपीसीसी ने स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर फैसला संबंधित विभागों और एजेंसियों को करना होगा। याचिकाकर्ता रीमा ने अपनी याचिका में कहा है कि कबूतरों की बीट से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है। ब्यूरो