नई दिल्ली। अनलॉक-2 में डीटीसी की बसों में सोशल डिस्टेंसिंग व मेट्रो सेवाएं बंद होने यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। अगर बस में सवार होने के बाद दो स्टॉप तक जगह मिली तो ठीक वर्ना ऑटो या टैक्सी से यात्रा की मजबूरी है जो एक महंगा विकल्प है। अगर कहीं पहुंचने की जल्दी हो तो ऑटो या टैक्सी से यात्रा लोगों की मजबूरी है।
दैनिक यात्रियों के मुताबिक अक्सर शुरुआती स्टैंड पर यात्रियों की संख्या 5-6 होती है, लेकिन 20 होते ही स्टॉप पर बसें नहीं रुकतीं। अगर कभी एक-दो यात्री कम हैं तो रुकते ही कई यात्रियों के पहुंचने पर उन्हें रोकना या बस से वापस भेजना पड़ता है। ऐसा ही नजारा बदरपुर से पंजाबी बाग जाने वाली रूट नंबर-479 बस में आश्रम पर पेश आया।
बस जैसे ही आश्रम पर रुकी, एक साथ कई यात्री बस की तरफ बढ़े। दो यात्रियों को बिठाने के बाद बाकी को बस में सवार होने से रोक दिया गया। इसके बाद धौला कुआं और नारायणा बस स्टॉप पर यात्रियों के उतरने के बाद अन्य सवारी को जगह मिली। बस चालक शैलेन्द्र के मुताबिक सुबह शाम जरूरी काम के सिलसिले में यात्रा करने वालों की अधिक संख्या होती है।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बस में 20 यात्रियों को ही सवार होने की इजाजत है। बसों में यात्रियों की संख्या पूरी होते ही ड्राईवर और कंडक्टर भी संक्रमण के डर से गेट खोलने से बचते हैं। ऐसे में कई स्टॉप पर यात्रियों के रोष का भी सामना करना पड़ता है तो कई बार मार्शल उन्हें समझाते हुए शांत करते हैं।