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दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: माता-पिता की सुरक्षा को खतरा न हो तो बेटे को नहीं कर सकते बेदखल, जानें मामला

Wed, 21 Oct 2026 06:37 AM IST
Digvijay Singh गौरव बाजपेई, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें कहा कि बेटे को माता-पिता के घर से तभी बेदखल किया जा सकता है, जब उनकी सुरक्षा को वास्तविक खतरा हो। यदि संपत्ति माता-पिता के घर से दूर हो और बेटा सह-भागीदार हो तो उत्पीड़न के आरोप पर बेदखली नहीं होगी।
 
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें कहा कि बेटे को माता-पिता के घर से तभी बेदखल किया जा सकता है, जब उनकी सुरक्षा को वास्तविक खतरा हो। यदि संपत्ति माता-पिता के घर से दूर हो और बेटा सह-भागीदार हो तो उत्पीड़न के आरोप पर बेदखली नहीं होगी।

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न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 16 अक्तूबर को राजेश बसोया की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने डिवीजनल आयुक्त के 14 जुलाई 2022 के आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश जिला मजिस्ट्रेट के 25 नवंबर 2019 के फैसले को बरकरार रखता था। उस फैसले में राजेश और उनके छोटे भाइयों को संपत्तियों से बेदखल करने का निर्देश था।
 
ये संपत्तियां ईस्ट ऑफ कैलाश, सी-167 और सी-167/ए/1, दसघारा मोहल्ला, रमेश मार्केट, गढ़ी में स्थित थीं। माता-पिता ने बेटों पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने शांति से रहने के लिए बेटों को निकालने की मांग की थी।
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राजेश बसोया ने अदालत को बताया कि वे संपत्ति के सह-भागीदार हैं। वे 2003 से वहां रह रहे हैं। उनके पिता ने 2012 में एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। वह मुकदमा 2019 में खारिज हो गया था। अदालत ने तब कहा था कि पिता संपत्ति के एकमात्र मालिक नहीं हैं और बेटा सह-भागीदार है।

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