दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा के आरोप में गिरफ्तार आरोपी शादाब आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि मामले की जांच अहम पड़ाव में है और आरोपी को घटनास्थल से पकड़ा गया है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष जमानत याचिका में दलील दी गई कि शादाब आलम के खिलाफ कोई और मामला दर्ज नहीं है और न ही वह किसी अन्य मामले में लिप्त है। उत्तर पूर्वी जिले में 22 से 24 फरवरी के दौरान हुई हिंसा के दौरान 24 फरवरी को शादाब को पुलिस ने पीसीआर कॉल पर गिरफ्तार किया था।
शादाब के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने शादाब के पास से ऐसी कोई भी वस्तु व्यक्तिगत रूप से उसके पास से बरामद नहीं की, जिससे यह साबित हो सके वह दंगों में शामिल था। इसके साथ ही उसने दावा किया कि इस मामले में अभी तक पुलिस के पास कोई ठोस सुबूत नहीं है।
सभी दलीलें सुनने के बाद पीठ ने आरोपी की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि चूंकि जांच चल रही है और जो लोग घटनास्थल पर मौजूद थे, उनका वैज्ञानिक साक्ष्य द्वारा पता लगाना आवश्यक है। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता उपद्रव का हिस्सा है, भले ही उसने व्यक्तिगत रूप से किसी भी वाहन या दुकानों को क्षति ना पहुंचाई हो, वह दंगे के लिए उत्तरदायी होगा।