दिल्ली सरकार ने बुधवार को उच्च न्यायालय को जानकारी दी कि तीसरे सीरो सर्वे के प्रारंभिक परिणामों से जुड़ी खबरें गलत हैं। दिल्ली की 33 फीसदी आबादी में नहीं, करीब 25 फीसदी में एंटीबॉडी बनी है। इस बारे में अधिकारियों ने मीडिया में कोई सूचना नहीं दी है।
सरकार की इस दलील पर हैरानी जताते हुए अदालत ने कहा कि सरकार प्रेस को अविश्वसनीय न बताए। इस तरह का खेल न खेलने की हिदायत भी अदालत ने सरकार को दी।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने दिल्ली सरकार के इस दावे को स्वीकार नहीं किया कि मीडिया में आई खबरें गलत हैं। अदालत का कहना है कि अगर ऐसा होता तो सरकार दूसरे दिन ही इस तरह की खबरों का खंडन करती, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने अदालत को बताया कि खबरों में सर्वे के प्रारंभिक परिणामों में 33 फीसदी लोगों के एंटीबॉडी मिलने की बात थी, जबकि अंतिम रिपोर्ट में आंकड़ा सिर्फ 25.1 प्रतिशत का है।
इससे पहले बीते 16 सितंबर की सुनवाई में दिल्ली सरकार ने अदालत को जानकारी दी थी कि अभी सीरो सर्वे का परिणाम तैयार नहीं है, जबकि अगले दिन रिपोर्ट मीडिया में प्रकाशित हुई थी। अदालत ने बुधवार को सरकार से सवाल किया कि रिपोर्ट पहले अदालत में रखने की जगह मीडिया में क्यों जारी की गई थी। इसके बाद सरकारी वकील ने खबरों के फेक होने की बात कही।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन और अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इन खबरों के बारे मेें जरूरी स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। अदालत अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें कोरोना की जांच बढ़ाने और तुरंत परिणाम हासिल करने की गुजारिश अदालत से की गई है।