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दिल्ली: बिना लाइसेंस के मोबाइल स्पाइवेयर के अवैध उपयोग के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र और पुलिस आयुक्त से मांगा जवाब 

Tue, 01 Feb 2022 07:09 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने केंद्र, दिल्ली के पुलिस आयुक्त के अलावा गूगल इंडिया, साइबर अपराध प्रकोष्ठ और साइबर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, हैलो स्पाई, एक्सएनस्पाई, स्पाईमीफोन और ओनेस्टोर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से भी जवाब मांगा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने हैकिंग और जासूसी के उद्देश्य से बिना लाइसेंस के मोबाइल स्पाइवेयर के अवैध उपयोग, बिक्री और संचालन के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र, दिल्ली के पुलिस आयुक्त सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया है कि इससे नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन होता है।

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न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने केंद्र, दिल्ली के पुलिस आयुक्त के अलावा गूगल इंडिया, साइबर अपराध प्रकोष्ठ और साइबर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, हैलो स्पाई, एक्सएनस्पाई, स्पाईमीफोन और ओनेस्टोर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से भी जवाब मांगा है। अदालत ने अब मामले की सुनवाई नौ मार्च को रजिस्ट्रार के समक्ष करने का निर्देश दिया है।

अधिवक्ता डिंपल विवेक की ओर से दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली पुलिस को बिना लाइसेंस या अनुमति के जासूसी सॉफ्टवेयर या मैलवेयर की बिक्री, हस्तांतरण, संचालन, विज्ञापन को प्रतिबंधित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में उक्त प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। इसके अतिरिक्त याचिका में भारत में ऐसे सभी विज्ञापनों को रोकने के लिए गूगल इंडिया पर विशिष्ट निर्देश देने की भी मांग की गई है जो ऐसे अवैध मैलवेयर और स्पाइवेयर की बिक्री को बढ़ावा देते हैं, विज्ञापन देते हैं या बेचने की अनुमति देते हैं।
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सुनवाई के दौरान याची डिंपल ने कोर्ट को बताया कि इस तरह के मोबाइल स्पाइवेयर का अवैध इस्तेमाल एक अदृश्य जेल की तरह है जो किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मैलवेयर किसी भी फोन में डाले जा सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मोबाइल हैक किया जा सकता है और सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है और सर्वेक्षण किया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह के मोबाइल स्पाइवेयर अत्यधिक व्यक्तिगत जानकारी को कैप्चर करने में सक्षम हैं, जिसमें एक जासूस को दूरस्थ रूप से स्थान को ट्रैक करने, टेक्स्ट संदेशों की निगरानी करने, कॉल सुनने, प्रत्येक फोटो और वीडियो को देखने, अपने परिवेश की निगरानी के लिए फोन के माइक्रोफोन को चालू करने और फोन के कैमरे से फोटो लेने की अनुमति देना शामिल है।

याची ने कहा एक बार इस तरह के मैलवेयर इंस्टॉल हो जाने के बाद, यह बिना किसी सूचना या पहचान गतिविधि के स्टील्थ मोड में चलता है और इसका पता लगाना या हटाना मुश्किल होता है। याचिका में कहा गया है प्रत्येक व्यक्ति को निजता के उचित व्यक्तिगत स्थान की आवश्यकता होती है और उम्मीद है। यह उचित समय है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को निजता के उल्लंघन और स्वतंत्रता के उल्लंघन के खिलाफ संरक्षित किया जाना चाहिए। यह माना गया है कि राष्ट्र की सुरक्षा के अलावा अन्य कारणों से नागरिकों के फोन और अन्य उपकरणों से अनधिकृत निगरानी और संग्रहित डेटा तक पहुंच अवैध और आपत्तिजनक होगी।

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