नई दिल्ली। दिल्ली में निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी प्रकार का शुल्क अभिभावकों से नहीं ले सकते हैं। ट्यूशन फीस के साथ अन्य कोई शुल्क मांगने पर न केवल उसे वापस करना होगा या फिर उसे समायोजित करना होगा। शिक्षा निदेशालय ने फीस को लेकर आ रही शिकायतों के बाद इस संबंध में आदेश जारी किया है। शिक्षा निदेशालय के इस आदेश को नहीं मानने वाले स्कूलों के खिलाफ दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट एंड रूल्स-1973 के सेक्शन-24 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि फीस को लेकर 18 अप्रैल को दिए गए आदेश का स्कूलों को पालन करना होगा। स्कूल अभिभावकों से केवल ट्यूशन फीस ही वसूलेंगे। स्कूल किसी प्रकार से वार्षिक शुल्क या विकास शुल्क व परिवहन शुल्क नहीं मांगेंगे। न ही स्कूल किसी प्रकार से बढ़ी ट्यूशन फीस मांग सकते हैं। फीस न देने पर किसी प्रकार से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं बंद नहीं की जाएंगी।
स्कूलों को आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता है। दिल्ली सरकार ने 18 अप्रैल को भी ऐसा ही आदेश जारी किया था, लेकिन जून के बाद से लगातार निदेशालय के पास शिकायतें आने लगीं कि स्कूल फीस को लेकर अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। फीस नहीं मिलने पर छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं से बाहर किया जा रहा है। ऐसे में सख्त रवैया अपनाते हुए शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को एक बार फिर से आदेश जारी किया है कि वह सिर्फ अभिभावकों से प्रति माह ट्यूशन फीस ही वसूल सकते हैं।
‘स्कूलों से फीस लौटाने का एफिडेविट मांगना चाहिए’
दिल्ली पैरेटें्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि अप्रैल में जारी आदेश के बाद भी स्कूलों की मनमानी पर कोई रोक नहीं लगी। अब देखना होगा कि इस आदेश में फीस ज्यादा लेने या अन्य शुल्क लेने पर कितने स्कूल अतिरिक्त फीस वापस करेंगे। आदेश में फीस लौटाने का एफिडेविट स्कूलों से मांगना चाहिए था। वहीं सेक्शन-24 की जगह सेक्शन-20 के तहत कार्रवाई की जाने की बात करनी चाहिए थी। सेक्शन-20 में स्कूल टेकओवर करने की बात है।