केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से दसवीं-बारहवीं के छात्रों के लिए सत्र को दो हिस्सों में बांटने का स्कूली छात्रों ने स्वागत किया है। छात्रों ने इसे सही समय पर उठाया गया छात्र हितैषी कदम बताया है। छात्रों का मानना है कि इस कदम से ना केवल वह बेहतर तैयारी कर सकेंगे, बल्कि शिक्षक भी उन्हें समय से बेहतर तैयारी करा सकेंगे।
मॉर्डन स्कूल के बारहवीं के छात्र नितिन शर्मा ने कहा कि इस योजना से छात्रों को एक ही बार में पूरा पाठ्यक्रम पढने की जरुरत नहीं पड़ेगी। पचास-पचास फीसदी पाठ्यक्रम होने के कारण बच्चों के सिर से बोझ काफी कम होगा। वह कहते हैं कि सीबीएसई ने इस बात को समझा है कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों पर कितना बोझ है। यह बोर्ड का छात्र हित में उठाया गया कदम है।
अर्वाचीन इंटरनेशनल स्कूल के बारहवीं के छात्र आर्यन यादव ने कहा कि सीबीएसई का यह निर्णय काफी उचित है। सबसे बड़ी बात इस मूल्यांकन योजना को समय रहते बता दिया गया है। इससे बच्चों को तैयारी के लिए समय मिलेगा। एमसीक्यू आधारित प्रश्न आने के कारण प्रारुप को समझने में भी मदद मिलेगी। लिटिल फ्लॉवर सीनियर सैकेंडरी स्कूल के छात्र अंशुल ने इस योजना को बड़ी राहत बताया।
उन्होंने कहा कि पचास फीसदी पाठ्यक्रम एक सत्र में आने से परीक्षा का तनाव भी कम होगा। इस तरह से हमें पूरा पाठ्यक्रम एक बार नहीं पढना होगा। लगातार आंतरिक मूल्यांकन होते रहने से इसे गंभीरता से लेंगे। महामारी के समय में यह कदम बच्चों के लिए काफी राहत भरा है। खासकर तब जबकि अभी यह नहीं पता कि ऑनलाइन पढ़ाई कब तक होनी है। हमारे पास नंबवर दिसंबर की परीक्षा के लिए भी समय होगा और फिर मार्च-अप्रैल में होने वाली परीक्षा की भी बेहतर तैयारी कर सकेंगे।