सुप्रीम कोर्ट दिल्ली जल बोर्ड की ओर से दायर नई याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। याचिका में हरियाणा सरकार को यमुना में दूषित जल छोड़ने से रोकने और दिल्ली को पर्याप्त पानी देने का निर्देश देने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई गुरुवार को सूचीबद्ध की है।
जल बोर्ड ने याचिका में कहा गया कि दिल्ली में संभावित पानी के संकट से निपटने के लिए हरियाणा को यमुना में जल छोड़ने का निर्देश दिया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि हरियाणा सरकार ने दिल्ली को बिना शोधित पानी की आपूर्ति घटा दी है, जिससे दिल्ली में पानी की किल्लत हो गई है।
यमुना के बिना शोधित जल को दिल्ली के वजीराबाद बैराज में संग्रहीत किया जाता है। वर्तमान में दिल्ली को हरियाणा से 47.9 करोड़ गैलन पानी मिलता है। इसके अलावा दिल्ली को नौ करोड़ गैलन भूमिगत जल और 25 करोड़ गैलन ऊपरी गंगा नहर से मिलता है।
दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने इस माह के शुरूआत में जारी एक बयान में कहा था कि यमुना के जल स्तर में निरंतर गिरावट आना विशेषकर गर्मियों के दिनों में और प्रदूषणकारी तत्वों की बढ़ोतरी होना, भारी चिंता का विषय है।