नई दिल्ली। वैज्ञानिक अध्ययन में प्लाज्मा थेरेपी का प्रभाव नहीं मिलने के बाद केंद्र सरकार का कोविड उपचार प्रबंधन इसे हटाने पर विचार कर रहा है। वहीं, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि इस थेरेपी ने कोरोना वायरस से उनकी जान बचाई है। प्लाज्मा थेरेपी को उपचार से हटाना गलत होगा।
दरअसल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की निगरानी में देश के कई अस्पतालों में 400 से ज्यादा संक्रमितों पर प्लाज्मा थेरेपी का अध्ययन किया गया था। इसमें यह पता चला कि प्लाज्मा देने के बाद भी संक्रमित मरीज को गंभीर अवस्था या फिर उनकी जान बचाने में कामयाबी नहीं मिली। हालांकि, इस अध्ययन के बाद भी दिल्ली के अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल बंद नहीं हुआ। अधिकतर निजी अस्पतालों में इस थेरेपी पर जोर दिया जा रहा है। इस वजह से तीमारदार प्लाज्मा लेने के लिए भटक रहे हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी प्लाज्मा दान के लिए लोगों से अपील की जा रही है।
जैन ने कहा कि दिल्ली में इसका फायदा होते हुए दिख रहा है। अब तक 2 हजार से ज्यादा लोगों को बैंक के जरिये प्लाज्मा दिया गया और कई ने खुद प्लाज्मा का इंतजाम किया। प्लाज्मा थेरेपी प्रभावी नहीं है ऐसा कहना गलत है।
प्लाज्मा बैंक पर दिल्ली सरकार ने दिखाई जल्दबाजी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ही एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी को शुरुआत से ही प्रयोगात्मक तौर पर रखा गया था। प्लाज्मा बैंक बनाने के लिए मंत्रालय ने किसी को निर्देश नहीं दिया। पहले दिन से ही इस थेरेपी को अध्ययन के बाद ही मान्यता देने की बात कही गई। दिल्ली सरकार ने प्लाज्मा बैंक भी तैयार कर लिया।
रोज कई लोग मांग रहे प्लाज्मा
सोशल मीडिया (खासतौर पर ट्विटर) पर हर दिन दिल्ली के कई लोग प्लाज्मा दान के लिए अपील कर रहे हैं। अलग- अलग व्हाट्सएप के जरिये मैसेज भी भेजे जा रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में सबसे ज्यादा प्लाज्मा थेरेपी दिया जा रहा है। दिल्ली एम्स के ही डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी को लेकर प्राइवेट अस्पतालों ने सबसे पहले दावे किए थ,े लेकिन उनका प्रभाव अध्ययन में नहीं मिला।