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Delhi News: संतोष की पत्नी को अनहोनी का हो गया था अहसास

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संतोष की पत्नी को अनहोनी का हो गया था अहसास
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पीतमपुरा में इमारत में आग लगने का मामला
बार-बार फोन करने पर पति से नहीं हो पा रही थी बात, पुलिसकर्मी ने फोन उठाकर दी मनहूस हादसे की जानकारी
संतोष दिन में ई-रिक्शा और रात में घर में रसोइया का काम करके परिवार का कर रहे थे जीविकोपार्जन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पीतमपुरा स्थित इमारत में जान गंवाने वाले रसोइया संतोष की पत्नी अनिता को रात में ही अनहोनी का अहसास हो गया था। रात नौ बजे से ही वह फोन कर अपने पति से संपर्क करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन लगातार फोन की घंटी बजने के बाद भी बात नहीं हो पा रही थी। फोन नहीं उठने पर उनके दिल की धड़कन बढ़ रही थी, जिस कारण वह लगातार पति से संपर्क करने में लगी थी। करीब आधे घंटे बाद एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया और उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। वह परिवार के सदस्यों के साथ सीधे आंबेडकर अस्पताल भागी। जहां पति की मौत की जानकारी मिलने के बाद वह सन्न रह गई।
अनिता बताती बताती है कि अमुमन वह अनिल कुमार के यहां खाना बनाने के बाद रात 10.30 बजे अपने घर पहुंच जाते थे। बृहस्पतिवार शाम सात बजे संतोष ने पत्नी से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि ठंड ज्यादा है वह जल्दी से काम निपटाकर घर आ जाएंगे। नौ बजे तक घर नहीं पहुंचने पर अनिता ने उनसे संपर्क किया। एक बार फोन नहीं उठाने पर उन्हें लगा कि काम में व्यस्त होंगे, लेकिन कुछ देर तक उनका फोन नहीं आने पर उन्हें चिंता होने लगी। उसने कुछ देर बाद फिर से फोन किया। लेकिन इस बार भी पूरी घंटी होने के बावजूद फोन नहीं उठा। उसके बाद अनिता को अनहोनी की आशंका सताने लगी। वह लगातार पति से संपर्क करने के लिए उन्हें फोन करती रही।
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करीब आधा घंटे बाद एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया और अनिता को हादसे की जानकारी दी। पुलिसकर्मी ने बताया कि घायलों को अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया है। अनिता ने अपने पति के बहनोई कुलदीप को घटना की जानकारी दी। उसके बाद वह चार साल की बेटी अनन्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ संतोष के स्वस्थ होने की भगवान से मन्नत मांगकर अस्पताल पहुंची। लेकिन कुछ ही देर में संतोष की मौत की सूचना ने अनिता की हंसती खेलती दुनिया को उजाड़ दिया।
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अपने अच्छे भविष्य के लिए पांच साल पहले दिल्ली आया था परिवार

अनिता ने बताया कि वह मूलत: यूपी के रायबरेली के उड़े रामू पुरवा गांव की रहने वाली हैं। गांव में खेत खलियान नहीं होने की वजह से वह पांच साल पहले परिवार सहित दिल्ली आ गईं। दिल्ली में वह शालीमार बाग के सिंगालपुर गांव में रहने लगीं। परिवार के जीविकोपार्जन के लिए संतोष सुबह में ई-रिक्शा चलाते थे। लेकिन इससे होने वाली आमदनी से परिवार का पालन पोषण नहीं हो रहा था। इसलिए एक साल से वह शाम को अनिल कुमार के घर रसोइया का काम करने लगे। अब भी पिता की मौत से बेखबर चार साल की अनन्या पिता के आने का इंतजार कर रही है। वह कहती है कि पापा काम पर गए हैं और जल्द घर आएंगे। उसकी बातों को सुनकर सभी की आंखों में आंसू आ रहे हैं। वह इस बात से अनजान है कि अब उसके पिता कभी वापस नहीं आएंगे। परिवार के लोगों का कहना है कि परिवार में संतोष ही एक मात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मौत से परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में परिवार ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
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