पीतमपुरा में इमारत में आग लगने का मामला : साहिल को माता-पिता और बहन को नहीं बचा पाने का है मलाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। इमारत में आग लगने की घटना में अपने माता-पिता और बहन को खोने वाले साहिल सदमे में हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि आग लगने की जानकारी मिलने के बावजूद वह परिवार को नहीं बचा सके। दरवाजे पर लगा इलेक्ट्रॉनिक लॉक अगर समय पर खुल जाता तो उनकी जान बच जाती। इन दर्द भरी घटना को याद कर साहिल के फूफा सुनील अग्रवाल की आंखें नम हो जाती है।
वह कहते हैं कि साहिल ने उन्हें बताया कि जिस समय घटना घटी उनके माता-पिता और बहन तीसरी मंजिल पर स्थित अपने फ्लैट में मौजूद थे। जबकि वह किसी से फोन पर बात करने के लिए इमारत की छत पर बनी बालकनी पर गए थे। इसी दौरान उन्होंने इमारत की नीचे वाली मंजिल से धुआं निकलता देखा। ऐसे में वह हकबका गए और परिवार को खोजते हुए नीचे की ओर भागे। धुआं इतना भयानक था कि सीढि़यां भी नहीं दिख रही थी। किसी तरह धुएं के बीच से वह अपनी जान बचाते हुए फ्लैट के दरवाजे के पास पहुंचे। उन्होंने दरवाजे को खोलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा लॉक होने की वजह से वह अंदर जाने में नाकाम रहे।
ऐसे में उन्होंने दरवाजे को पीटते हुए परिवार वालों को आवाज लगाई, लेकिन अंदर से भी कोई जवाब नहीं मिला। इस दौरान सीढि़यों पर धुआं और बढ़ गया, उन्हें आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी होने लगी। ऐसे में वह अपनी जान बचाकर छत की ओर भागे और घटना की जानकारी दमकल विभाग और पुलिस को दी।
सुनील अग्रवाल ने बताया कि इस फ्लैट में उनके साले राकेश गुप्ता, अपनी पत्नी रेणू, बेटी श्वेता, बेटा साहिल और बहू सिमरन के साथ रहते थे। साहिल और सिमरन मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। सिमरन घटना के समय अपने कार्यालय गई हुई थी। घटना के दौरान साहिल ने अपनी पत्नी को फोन कर जानकारी दी और उन्हें जल्द घर पहुंचने के लिए कहा। इस बीच हादसे की जानकारी मिलने के बाद दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया। धुएं की वजह से साहिल को भी सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। दमकल कर्मियों ने साहिल को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने उन्हें तुरंत पास के अस्पताल में पहुंचाया। जहां उनकी जान बच गई। उधर सूचना मिलने के बाद घर पहुंची सिमरन ने देखा कि उनके सास, ससुर और ननद की हादसे में मौत हो गई है।