बता दें कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता सार्वजनिक तौर पर यह बात कह चुके हैं कि शाहीन बाग का प्रदर्शन भाजपा जानबूझकर खत्म नहीं करा रही है। केजरीवाल ने तो इतना भी कह दिया है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पास शक्ति है, तमाम संसाधन हैं, वे चाहें तो कुछ ही देर में शाहीन बाग की सड़क खाली करा सकते हैं।
मगर वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें राजनीति करनी है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने शाहीन बाग के प्रदर्शन के लिए सीधे तौर पर केजरीवाल को जिम्मेदार ठहरा दिया है। दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि केजरीवाल चाहते तो शाहीन बाग का प्रदर्शन कब का खत्म हो गया होता। वे अपने डीएम को आदेश दें और सड़क खारी करा दें। उन्हें कौन रोक रहा है।
गुरुवार को दिल्ली पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने खुलासा किया है कि शाहीन बाग का प्रदर्शन अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। पिछले तीन चार दिनों की रिपोर्ट पर गौर करें तो वहां अब लोगों का आना-जाना कम हो गया है। सुरक्षा के चलते पुलिस ने जब से लोगों के दस्तावेज जांचने शुरू किए, तो वहां पर आने वालों का आंकड़ा कम हो गया। रात को मुश्किल से दो सौ प्रदर्शनकारी भी नहीं रहते।
खैर, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को अलर्ट पर रखा गया है। अतिरिक्त बसों एवं एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। साथ ही तीन सौ से अधिक महिला पुलिस कर्मियों को रिजर्व में रखा गया है। जहां तक खुली जेल की बात है तो ये कोई नया काम नहीं है। जब भी कोई प्रदर्शन होता है तो पुलिस कई जगह पर इस तरह की खुली जेल बना देती है।
चूंकि प्रदर्शनकारी ज्यादा संख्या में होते हैं, इसलिए उन्हें थानों में बंद नहीं किया जा सकता। कुछ घंटे के लिए उन्हें स्टेडियम आदि में रोका जाता है। ये स्टेडियम भी ऐसी जगहों में चिन्हित किए जाते हैं, जो प्रदर्शन स्थल से अच्छी दूरी पर हों। जैसे बवाना, कंझावला या नांगलोई स्थित सूरजमल स्टेडियम को खुली जेल के लिए तैयार कर दिया जाता है। ऊपर से जो भी आदेश आएगा, उसी के मुताबिक पुलिस कार्रवाई करेगी।