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CJP Protest: 'अब की पीढ़ी सवाल करती है, उन्हें कोई...'; नई पीढ़ी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा संदेश

Sat, 25 Jul 2026 08:45 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, अमेठी

सार

Mohan Bhagwat on CJP Protest: दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार और नई पीढ़ी पर विस्तार से चर्चा की है। भागवत ने कहा कि  जब हम युवा थे, तो वह दौर आज्ञा मानने का था। अब ऐसा नहीं है। नई पीढ़ी सवाल पूछती है। हमें उनसे बातचीत करनी होगी।
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Mohan Bhagwat - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में 'विश्व मंगलम् सभा' को संबोधित किया। उन्होंने परिवार, संस्कार और आज की नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात की। भागवत ने 'युगानुकूल मातृत्व' कार्यक्रम के समापन सत्र में भी अपने विचार रखे। यह दो दिवसीय कार्यक्रम विश्वमंगल्य सभा द्वारा 23 और 24 जुलाई को आयोजित किया गया था।
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मोहन भागवत ने कहा कि बदलते समय के साथ बच्चों की अपेक्षाएं भी बदल गई हैं। अब बच्चे केवल आज्ञा का पालन नहीं करते, बल्कि हर बात पर तर्क और स्पष्टीकरण चाहते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को प्यार, समय और निरंतर संवाद देना चाहिए। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि तब माता-पिता पर पूरा भरोसा और श्रद्धा होती थी। 

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भागवत ने जोर दिया कि आज की पीढ़ी अधिक जिज्ञासु है और हर चीज के पीछे का तर्क समझना चाहती है। उन्होंने कहा कि परिवारों के भीतर बातचीत बंद हो गई है, जिसे फिर से शुरू करना आवश्यक है। RSS प्रमुख ने भारतीयों से बिना सोचे-समझे पश्चिमी जीवनशैली अपनाने के बजाय अपनी संस्कृति अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मातृत्व के बिना दुनिया का निर्माण, पालन-पोषण और अस्तित्व संभव नहीं है। मातृत्व ही सृष्टि के पालन-पोषण और निरंतरता का मूल आधार है।
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नई पीढ़ी और संवाद का महत्व
भागवत ने बताया कि जब वे युवा थे, तब आज्ञा मानने का दौर था। अब नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उन्हें तर्क समझाना पड़ता है। बच्चों को बहुत प्यार देना और उनके साथ समय बिताना महत्वपूर्ण है। उनसे लगातार बातचीत करनी चाहिए ताकि वे अपनी बातें रख सकें। यह संवाद परिवारों के भीतर संबंधों को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों को धैर्यपूर्वक समझाना आवश्यक है।

 

भारतीय संस्कृति और व्यक्तिवाद पर विचार
मोहन भागवत ने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान देश का अपनी परंपराओं से भरोसा उठ गया था। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक यह गलतफहमी फैलाई गई कि भारतीय परंपराएं गलत हैं। भागवत ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक नींव बहुत मजबूत और स्पष्ट है। हमें अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं में विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने दुनिया भर में मातृत्व, विवाह और परिवार पर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया। भागवत ने इस चलन को "अत्यधिक व्यक्तिवाद" कहा। उन्होंने दावा किया कि जिन समाजों ने ऐसे विचारों को अपनाया, वे अब उन पर सवाल उठा रहे हैं।
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भागवत ने कहा कि कुछ लोग मानते थे कि विज्ञान पूर्ण है और हर सवाल का जवाब दे सकता है। आज वैज्ञानिक भी विज्ञान की सीमाओं को पहचानते हैं और स्वीकार करते हैं कि विज्ञान हर सवाल का जवाब नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं व्यावहारिक अनुभव पर आधारित हैं। 
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