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खुदरा शराब विक्रेताओं ने नई आबकारी नीति को दी चुनौती

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नई दिल्ली। खुदरा शराब विक्रेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली सरकार की 2021-2022 के लिए बनाई गई नई आबकारी नीति को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने इसे अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताया है।
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मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने फिलहाल सरकार की नीति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता रेडीमेड प्लाजा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एसोसिएशन ने आग्रह किया था कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि अदालत की मंजूरी के बिना बोली को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।
याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकार का तर्क गलत है कि यह नीति एकाधिकार या कार्टेल के गठन को हतोत्साहित करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा नई नीति से गुटबंदी होगी क्योंकि दिल्ली पर अब 16 लोगों का नियंत्रण होगा जबकि पहले 850 लोग इसमें शामिल थे। अदालत ने मामले की सुनवाई 9 अगस्त तय की है।
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याचिका पिछले 15 साल से दिल्ली में खुदरा शराब विक्रेताओं ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि हाल तक दिल्ली में शराब की बिक्री को दिल्ली उत्पाद नियम, 2010 द्वारा विनियमित किया जाता था।
दिल्ली सरकार ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में मंत्री समूह की समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस साल जून में 2021-22 के लिए नई आबकारी नीति लागू की। समिति में मंत्री कैलाश गहलोत और सत्येंद्र जैन शामिल थे। नई नीति के अनुसार लाइसेंस जारी करने के उद्देश्य से दिल्ली को 32 जोनों में बांटा गया है, जिसमें प्रत्येक में 9-10 वार्ड हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नई आबकारी नीति की योजना जिसमें प्रत्येक जोन के लिए एक एल-7 जेड लाइसेंस प्रदान किया जाता है और लाइसेंस धारक द्वारा 18 खुदरा विक्रेताओं को चलाने को अनिवार्य करने से मौजूदा विक्रेताओं को समाप्त कर दिया जाएगा। एक जोन लाइसेंस के लिए न्यूनतम आरक्षित मूल्य लगभग 200 करोड़ रुपये निर्धारित है, जो मौजूदा खुदरा विक्रेताओं को दिवालिया कर देगा।
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