फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणतंत्र दिवस हिंसा : लक्खा सिधाना को राहत, एक और मामले में गिरफ्तारी पर रोक

Wed, 30 Jun 2021 05:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • पुलिसकर्मियों पर हमला करने के मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत  
  • जांच में शामिल होने का निर्देश
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अदालत ने गैंगस्टर से राजनीति में आए लक्खा सिधाना को गणतंत्र दिवस पर किसानों द्वारा नए कृषि कानून के विरोध में आयोजित ट्रैक्टर रैली के एक और मामले में राहत प्रदान करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अदालत ने अब उसे पुलिसकर्मियों पर हमला करने के मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है।

विज्ञापन


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आनंद ने सिधाना को 19 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करते हुए उसे जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। अदालत ने तीन दिन पहले उसे गणतंत्र दिवस हिंसा से जुड़े एक और मामले में तीन जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की थी।

दिल्ली पुलिस ने पूर्व में सिधाना के बारे में सूचना देने वाले को एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की थी। गिरफ्तारी के डर से, उसने दोनों मामलों में अग्रिम जमानत के लिये दिल्ली की रोहिणी अदालत में याचिका दायर की थी।
विज्ञापन


 दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के वकीलो के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने अदालत में सिधाना का पक्ष रखा।  प्राथमिकी के मुताबिक इस साल 26 जनवरी को सिंघू बॉर्डर से प्रदर्शनकारी जीटी करनाल रोड पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस के बैरीकेड उखाड़ दिए, तलवारों के साथ दंगा किया। 

पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें रोकने की कोशिश की तो सभी ने मारने के इरादे से पुलिस अधिकारियों की तरफ अपने ट्रैक्टर दौड़ाए। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिये पानी की बौछार छोड़ी गई और आंसू गैस के गोले दागे गए। भीड़ ने आंसू गैस के गोले वापस पुलिस की तरफ फेंकेने शुरू कर दिए। इस घटना में कई पुलिसकर्मी और डीटीसी का एक बस चालक घायल हुआ।

पुलिस निरीक्षक अनिल कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई प्राथमिकी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने अपने नियोजित उद्देश्य के साथ, किसान एसोसिएशनों द्वारा तय मार्गों से अलग रास्ता चुना और हिंसा की।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें