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जेएनयूः पुलिस के दखल पर 36 घंटों के बाद प्रो. वंदना गुप्ता रिहा

Sun, 10 Nov 2019 01:45 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में दिल्ली पुलिस के दखल पर 36 घंटों के बाद एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट प्रो. वंदना गुप्ता रिहा हो पाईं।  

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शुक्रवार सुबह स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में क्लास लेने पहुंचीं प्रो. वंदना को छात्रों ने बंधक बना लिया था। लगातार डफली, ढोल व नारों के बीच प्रो. गुप्ता को छात्र एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट के पद से इस्तीफा देने की मांग कर रहे थे। तबीयत ज्यादा खराब होने पर पुलिस को जबरदस्ती प्रो. गुप्ता को छात्रों के चंगुल से आजाद करवाना पड़ा।

जेएनयू कैंपस में शनिवार को प्रो. वंदना गुप्ता की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसी दौरान दिल्ली पुलिस कैंपस में सादे पोशाक में पहुंची। विश्वविद्यालय हेल्थ सेंटर की डॉक्टरों की टीम ने छात्रों से प्रो. गुप्ता को छोड़ने की मांग रखी, क्योंकि उनका बीपी कभी हाई और कभी लो हो रहा था।
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डॉक्टरों की टीम की मांग पर कोई सुनवाई न करने पर आखिर पांच बजे के करीब पांच घंटों के इंतजार के बाद पुलिस ने छात्रों को खदेड़ते हुए प्रो. गुप्ता को उग्र छात्रों के चंगुल से बचाया और एंबुलेंस से निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। प्रो. गुप्ता ही हालत स्थिर है। हालांकि मानसिक प्रताड़ना का असर काफी हुआ है। वे खाना नहीं खा रही है। बार-बार सहम जाती हैं।

उग्र प्रदर्शन के बीच प्रो. गुप्ता को सोने नहीं दिया:
प्रो. गुप्ता लगातार 36 घंटे तक छात्रों के उग्र विरोध का शिकार हुई। इस बीच उन्हें सोने भी नहीं दिया गया। डफली मंजीरे व तालियों के साथ नारेे और प्रदर्शन करते रहे। छात्रों का मकसद प्रो. गुप्ता पर मानसिक प्रेशर बनाकर उनसे इस्तीफा लेना था। हालांकि प्रो. गुप्ता ने भी हिम्मत नहीं हारी।
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मांगों के लिए छात्रों ने उग्र प्रदर्शन में संवेदनाओं को गिराया
जेएनयू प्रबंधन के मुताबिक, कैंपस में छात्रों का एक नया उग्र रूप देखने को मिला। वे नए हॉस्टल नियम को वापस लेने की मांग पर इतने उग्र हो गए कि संवेदनाओं को बिल्कुल नीचे गिरा दिया। पहले डीन ऑफ स्टूडेंट की एंबुलेेंस को करीब सात घंटे तक सीने में तेज दर्द और बीपी हाई होने के बाद भी रास्ता नहीं दिया गया था। इसके बाद एक किडनी के सहारे जीवन यापन कर रहे प्रोवोस्ट प्रो. संतोष शुक्ला से जबरदस्ती इसी उग्रता के साथ इस्तीफा मांगा और उन्होंने दे भी दिया। क्योंकि प्रो. शुक्ला बीमार रहते हैं। ऐसे ही कई प्रोवोस्ट ने अपने पद से इसलिए इस्तीफा दे दिया, क्योंकि वे अपने परिवार व बच्चों पर कोई खतरा नहीं चाहते थे।

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