निदेशालय ने ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का लिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शिक्षा निदेशालय ने उत्तर-पूर्वी जिले के सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को बिना अनुमति के छुट्टी पर जाना या ड्यूटी से अनुपस्थित रहने को अस्वीकार्य करार देते हुए इसके खिलाफ सख्त निर्देश जारी किया है। निदेशालय ने ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया है।
आदेश में कहा गया है कि कुछ प्रधानाचार्य बिना अनुमति लिए ही छुट्टी पर चले जा रहे हैं। यह गलत और अनुचित व्यवहार है। ऐसे में अब सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि कोई भी बिना निदेशालय से पूर्व अनुमति के छुट्टी पर नहीं जाएगा और न ही ड्यूटी से अनुपस्थित रहेगा। आदेश में साफ कहा गया है कि प्रधानाचार्य को अपनी छुट्टी का आवेदन काफी पहले जमा करना होगा। छुट्टी पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी होगी कि आवेदन स्वीकृत हो चुका है। सभी छुट्टी आवेदन अब ऑनलाइन एमआईएस पोर्टल के जरिए जमा करने होंगे। आवेदन की हार्ड कॉपी पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए। इसके बाद इसे जोन कार्यालय में जमा करना होगा, जहां से डीडीई जोन-IV की सिफारिश के साथ आगे भेजा जाएगा।
हाफ पे लीव के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी
कम्यूटेड हाफ पे लीव (आधी तनख्वाह पर छुट्टी) के आवेदन के साथ अनिवार्य रूप से अधिकृत डॉक्टर का वैध मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना होगा। बिना इस प्रमाण-पत्र के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा आदेश में चेतावनी दी गई है कि बिना पूर्व अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहना (प्रमाणित मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर) अनधिकृत अनुपस्थिति माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश उत्तर-पूर्वी दिल्ली-1 के सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के लिए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे स्कूलों में अनुशासन और सुचारु कार्यप्रणाली बनी रहेगी।