जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के पूर्व प्रमुख विकार रसूल वानी ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार का समर्थन केवल भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में आने से रोकने के लिए कर रही है। उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। वानी ने यह बयान राहुल गांधी द्वारा आयोजित 'दिवाली मिलन' कार्यक्रम के दौरान एएनआई से बातचीत में दिया।
वानी ने हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एनसी विधायकों की कथित आंतरिक नाराजगी को पार्टी का अंदरूनी मामला बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मंत्रियों की निर्धारित संख्या 10 प्रतिशत है। किसे मंत्रिमंडल में शामिल करना है, यह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विशेषाधिकार था। कांग्रेस सरकार के कामकाज से असंतुष्ट होने के बावजूद समर्थन जारी रखेगी। इसके दो मुख्य आधार हैं। पहला, एनसी 'इंडिया' गठबंधन में सहयोगी है। दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि बीजेपी सरकार न बना पाए। वानी ने आरोप लगाया कि एनसी सरकार अपने चुनावी घोषणापत्र और गारंटियों को लागू करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को सरकार के कामकाज में कोई सुधार नहीं दिखा है। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने तक सरकार में मंत्री पद लेने से इन्कार कर दिया था।
राज्य के दर्जे की मांग
कांग्रेस का रुख है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह कोई मंत्रालय नहीं लेगी। वानी ने दोहराया कि यह पार्टी का पहले भी रुख था और आज भी यही है। पार्टी चाहती है कि जम्मू-कश्मीर फिर से पूर्ण राज्य बने। साथ ही, यहां के लोगों की नौकरियों और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष
ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि 20 से ज़्यादा विधायकों ने नाराजगी जताई है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने इस हफ्ते की शुरुआत में लोकसभा और पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को पार्टी में फूट की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि संगठन एकजुट है और विधायकों की चिंताओं का समाधान किया जाएगा।