नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा नागरिकता कानून के खिलाफ संसद मार्ग तक निकाले गए पैदल मार्च में बाहरियों के शामिल होने से सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों के प्रदर्शन में बटला हाउस, सरिता विहार और शाहीन बाग के लोग शामिल हो गए। इन बाहरियों की पुलिस से बैरिकेड पर झड़प हो गई, जिन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। इससे भगदड़ मच गई। भगदड़ में कई छात्र गंभीर रूप से चोटिल हो गए, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। जामिया के छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने बेवजह शांतिपूर्ण मार्च में अराजकता का नाम लेकर लाठीचार्ज कर छात्रों को घायल किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि छात्रों के प्रदर्शन को संसद मार्ग जाने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने छात्रों की भीड़ में शामिल होकर पुलिस से झड़प का प्रयास किया, जिनकी पहचान की जा रही है। देर शाम तक मार्च पर अड़े छात्रों को पुलिस बसों में बिठाकर बदरपुर पुलिस थाने ले गई, जहां उन्हें रिहा कराने के लिए जामिया के अन्य छात्रों की भीड़ एकत्र हो गई।
जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी की ओर से सीएए-एनआरसी के खिलाफ पैदल मार्च निकालकर संसद मार्ग पहुंचने का आह्वान किया गया था, जिसके बाद सैकड़ों छात्र जामिया के गेट नंबर 7 पर सुबह से ही पहुंचने लगे थे। पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए होली फैमिली अस्पताल व सुखदेव विहार मेट्रो अस्पताल पर बैरिकेड लगा रखा था। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। हंगामे की आशंका को देखते हुए केंद्रीय बल भी बैरिकेड पर तैनात थी। छात्रों का पैदल मार्च दोपहर 1 बजे जैसे ही संसद मार्ग के लिए आग बढ़ा, तभी पुलिस ने उन्हें होली फैमिली अस्पताल पर रोक लिया। पुलिस के रोके जाने से छात्र आक्रोशित हो गए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान जामिया के आसपास रहने वाले बाहरियों का वहां जमावड़ा लगने लगा। देखते ही देखते छात्र व बाहरी लोगों की पुलिस से कहासुनी हो गई। पुलिस ने भीड़ को अराजक होता देखकर लाठियां भांजकर खदेड़ने का प्रयास किया। पुलिस के लाठियां भांजने से वहां भगदड़ मच गई। इसमें कई छात्र चोटिल हो गए, लेकिन छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने जामिया के छात्रों को चिह्ति कर उन पर ही लाठी बरसाई हैं। चोटिल छात्रों को एंबुलेंस अस्पताल ले गई। एक ही बैरिकेड पर पुलिस की घेराबंदी देखकर बटला हाउस, जामिया, सरिता विहार और शाहीन बाग के लोगों ने छात्रों के साथ सुखदेव विहार की ओर से संसद मार्ग जाने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने मेट्रो स्टेशन के नीचे लगे बैरिकेड पर ही रोक दिया। इसके बाद तो प्रदर्शन में शामिल 50 से अधिक नाबालिग पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को ही लेकर भाग गए। पुलिस ने उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे पुलिस से ही भिड़ गए। माहौल तनावपूर्ण होता देखकर मौके पर महिला पुलिस की संख्या में इजाफा कर भीड़ से छात्र-छात्राओं को हटाने का प्रयास किया गया। इसके बाद भी बाहरी लोग माहौल खराब करने का प्रयास करते रहे। हंगामा शांत न होता देखकर पुलिस ने जैसे ही छात्रों को हिरासत में लेना शुरू किया तो यह देखकर बाहरी तत्वों ने वहां से भागने में अपनी गनीमत समझी। आरोप है कि करीब 200 प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस हिरासत में लेकर बदरपुर थाने ले गई।
बुर्का उतारकर फेंकने का आरोप
जामिया की छात्राओं का आरोप है कि प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मियों ने हमला किया और बुर्का उतारकर फेंक दिया। करीब 14 छात्राएं प्रदर्शनस्थल पर बेसुध हो गईं, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि उन पर बुर्का उतारने का आरोप पूरी तरह से गलत है। छात्राओं की आड़ में कुछ लोगों ने पुलिस पर हमले का प्रयास किया, जिसकी चपेट में आकर छात्राएं चोटिल हो गईं। पुलिस का कहना है कि भगदड़ मचने से कुछ छात्राएं उसकी चपेट में आ गई।
पानी का पाउच फेंकने पर हल्का बल प्रयोग
सुरक्षा बलों ने उस समय प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग किया, जब प्रदर्शनकारियों ने उन पर पानी के पाउच फेंके और गालियां देनी शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में कुछ लोगों ने माहौल खराब करने के लिए चेहरे को कपड़े से ढंक रखा था, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पहचान छिपाने के लिए हेल्मेट पहन रखा था।
बेहोश हुई छात्राओं को बताया लाठीचार्ज का शिकार
प्रदर्शन में शामिल कई छात्राओं के बेहोश होने पर उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। जामिया के छात्राओं ने इस बेहोशी को लाठीचार्ज से जोड़ दिया, जबकि कुछ लोगों की अराजकता से वहां भगदड़ मच गई, जिसकी चपेट में आकर वह चोटिल हो गईं। वहीं कुछ ऐसी भी छात्राएं घायल हुई हैं जो जबरन बैरिकेड पर चढ़कर इसे तोड़ने का प्रयास कर रही थीं। इन छात्राओं को रोकने के लिए महिला पुलिस कर्मियों ने बल प्रयोग किया था, जिसमें पांच छात्राएं चोटिल हुई थीं।
सोशल मीडिया पर अपलोड की तस्वीरें
जामिया के चोटिल छात्रों ने अपनी तस्वीरें खींचकर लाठीचार्ज का आरोप लगाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दीं। इन तस्वीरों को देखकर हर कोई सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस के कार्रवाई की निंदा करने लगा। आलम यह था कि कुछ राजनीतिक पार्टियों ने बगैर कुछ जाने-समझे इसे पुलिस की क्रूरता से परिभाषित कर दिया। पुलिस का कहना है कि वह छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दे सकता है, लेकिन उनकी आड़ में कुछ अराजक तत्व माहौल खराब करने के प्रयास में थे।
प्रोक्टर व पीआरओ के अनुरोध को भी छात्रों ने किया दरकिनार
पुलिस से झड़प के दौरान जामिया के पीआरओ अहमद अजीम और प्रॉक्टर छात्रों से पीछे हटने की अपील करते रहे, लेकिन छात्रों ने उनकी भी एक न सुनी। जामिया के प्रशासनिक अधिकारी हर घंटे शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील करते रहे, लेकिन उनकी किसी ने एक न सुनी। प्रशासनिक अधिकारी अपील करते नजर आए कि प्रदर्शन में कुछ बाहरी लोग शामिल हैं, इसलिए वह वापस कैंपस की ओर लौट जाएं।