-राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान की याचिका खारिज
-संस्थान ने कैट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सेवा विवाद से जुड़े मामले में अंतरिम राहत जारी रखी गई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के केवल स्थगन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा है कि ऐसी याचिकाएं अदालतों पर अनावश्यक बोझ डालती हैं और समय की बर्बादी का कारण बनती हैं। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईआलआईटी) की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। संस्थान ने कैट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सेवा विवाद से जुड़े एक मामले में अंतरिम राहत जारी रखी गई थी। सुनवाई की तारीख 30 जून तय की गई थी।
पीठ ने कहा कि जब अधिकरण ने पहले ही मामले को तय तारीख पर अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। साथ ही, यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उस दिन कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा, तो ऐसे में हाईकोर्ट का रुख करना उचित नहीं है। यह मामला एनआईईआलआईटी और उसके कर्मचारी राज कुमार त्रिपाठी के बीच स्थानांतरण विवाद से जुड़ा है। कर्मचारी ने 24 मार्च 2026 के ट्रांसफर आदेश को कैट में चुनौती दी थी, जिसके तहत उनका तबादला दिल्ली से औरंगाबाद किया गया था।
कैट ने मामले को 30 जून 2026 तक स्थगित कर दिया
कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि उनका स्थानांतरण दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया। साथ ही, उन्हें तय समय से पहले ही कार्यमुक्त कर दिया गया। इस पर कैट ने 2 अप्रैल 2026 को अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। बाद में कैट ने मामले को 30 जून 2026 तक स्थगित कर दिया, जिसे चुनौती देते हुए संस्थान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थगन मांगने का प्रयास उचित नहीं है। अदालत ने कैट से अनुरोध किया कि मामले की अंतिम सुनवाई 30 जून को ही की जाए और किसी भी पक्ष को आगे स्थगन की अनुमति न दी जाए।